पंजाब की भगवंत मान सरकार की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत पिछले छह महीनों में 14,032 मरीजों को सांस संबंधी बीमारियों का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया गया है, जबकि ₹37.30 करोड़ के उपचार का खर्च योजना के तहत कवर किया गया. योजना के आंकड़ों के अनुसार, फेफड़ों की पुरानी बीमारियों और थोरेसिक सर्जरी के 80 प्रतिशत से अधिक मामले वयस्कों और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े हैं. इसलिए सांस फूलने को अक्सर सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है.
लगातार रहने वाली खांसी को मौसम का असर मान लिया जाता है और घरघराहट (व्हीजिंग) को तब तक गंभीरता से नहीं लिया जाता, जब तक सीढ़ियां चढ़ना भी मुश्किल न हो जाए. तब तक कई मरीज गंभीर फेफड़ों की बीमारी का शिकार हो चुके होते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ता है या फिर बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है.
क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं
मुख्यमंत्री सेहत योजना (एमएमएसवाई) के तहत पंजाब के ताजा उपचार आंकड़े बताते हैं कि क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं. अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करवाने वाले मरीजों का एक बड़ा हिस्सा राज्य के कामकाजी आयु वर्ग से है, जो यह दर्शाता है कि सांस संबंधी बीमारियां स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ा रही हैं.
अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, क्रॉनिक फेफड़ों की बीमारियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं और अपने आप ठीक नहीं होतीं. जितनी जल्दी इनका पता चल जाए, फेफड़ों को होने वाले नुकसान को उतना ही अधिक आसानी से रोका जा सकता है. दवाइयां और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से लाभ मिलता है. गंभीर मामलों में थोरेसिक सर्जरी जीवन बचा सकती है. ऐसे में इलाज में देरी करना कभी भी सही विकल्प नहीं होता. दुर्भाग्य से इलाज का खर्च वहन न कर पाने के कारण कई मरीज इलाज में देरी करते हैं.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाई जा रही स्वास्थ्य योजना ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के अंतर्गत राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA), पंजाब के साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 8 जनवरी से 21 जुलाई 2026 के बीच 14,032 लोगों ने फेफड़ों की पुरानी बीमारियों तथा थोरेसिक सर्जरी/सांस संबंधी उपचार का लाभ उठाया. इन उपचारों पर ₹37.30 करोड़ की कैशलेस राशि का भुगतान किया गया. इन आंकड़ों के पीछे उन हजारों मरीजों की कहानी है, जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने से पहले लाखों रुपये की व्यवस्था करने की चिंता नहीं करनी पड़ी. यही इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है.
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36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार मामले किए गए दर्ज
आंकड़ों के अनुसार, 36 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 5,559 उपचार मामले दर्ज किए गए, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के 5,659 वरिष्ठ नागरिकों ने भी अस्पताल में उपचार प्राप्त किया. ये दोनों आयु वर्ग मिलकर योजना के तहत हुए कुल सांस संबंधी उपचार मामलों के 80 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखते हैं. इसके अलावा 2,522 युवा वयस्कों तथा 292 बच्चों ने भी सांस संबंधी उपचार प्राप्त किया.
लिंग आधारित आंकड़ों के अनुसार, 8,345 पुरुषों का ₹22.79 करोड़ की लागत से उपचार किया गया, जबकि 5,684 महिलाओं को ₹14.50 करोड़ के उपचार का लाभ मिला. इसके अतिरिक्त अन्य (Other) लिंग श्रेणी के तीन लाभार्थियों ने भी योजना के तहत कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया.
मासिक आंकड़े दर्शाते हैं कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान विशेष सांस संबंधी सेवाओं की मांग लगातार बनी रही. उपचार मामलों की संख्या जनवरी में 1,332 से बढ़कर अप्रैल में 2,509 हो गई, जो छह महीनों की अवधि में सबसे अधिक रही. हालांकि जून में 2,004 मामले दर्ज किए गए, लेकिन उपचार मूल्य ₹6.73 करोड़ रहा, जो सबसे अधिक था. यह दर्शाता है कि योजना के तहत अधिक जटिल और महंगे सांस उपचार भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं.
सांस संबंधी बीमारियों के लोगों को अधिक जागरूक रहने की जरूरत
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, ‘ये आंकड़े सांस संबंधी बीमारियों के प्रति लोगों को अधिक जागरूक करने की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं. लोग लगातार रहने वाली खांसी या सांस फूलने को अक्सर अस्थायी समस्या या बढ़ती उम्र का सामान्य लक्षण मानकर नजरअंदाज कर देते हैं.
दुर्भाग्यवश, दीर्घकालिक फेफड़ों की बीमारियां धीरे-धीरे और बिना स्पष्ट संकेतों के बढ़ती रहती हैं. जब तक कई मरीज चिकित्सकीय सहायता लेते हैं, तब तक फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच चुका होता है. सांस फूलने की समस्या को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर उपचार से फेफड़ों, जीवन और आजीविका-तीनों को बचाया जा सकता है.’
स्वास्थ्य मंत्री ने धूम्रपान करने वालें लें चिकित्सकीय से परामर्श
स्वास्थ्य मंत्री ने विशेष रूप से धूम्रपान करने वालों, औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों तथा धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहने वाले लोगों से अपील की कि यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें. उन्होंने तंबाकू से दूर रहने, प्रदूषित वातावरण के संपर्क को कम करने तथा सांस के पुराने रोगों से पीड़ित लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच करवाने पर भी जोर दिया.
बीमारी की समय पर पहचान, तंबाकू का सेवन छोड़ना, वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करना, कार्यस्थल पर सुरक्षा उपाय अपनाना तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार प्राप्त करना फेफड़ों की पुरानी बीमारियों की रोकथाम और बड़ी थोरेसिक सर्जरी की आवश्यकता को टालने के सबसे प्रभावी उपाय हैं.
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