पत्रकार निखिल वागले और शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल हुई है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने दाखिल की है. इस याचिका का आधार चीफ जस्टिस के बारे में उनकी आपत्तिजनक टिप्पणियों को बनाया गया है. SCBA ने चीफ जस्टिस के बारे में वागले और राउत की आपत्तिजनक टिप्पणियों का हवाला देते हुए अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी से केस दाखिल करने के लिए सहमति मांगी थी.
कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 15 के तहत सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति जरूरी होती है.
अटॉर्नी जनरल ने दी मुकदमा चलाने की सहमति
अटॉर्नी जनरल वेंकटरमनी ने SCBA के पत्र पर विचार करने के बाद मुकदमा चलाने के लिए सहमति दे दी है. उन्होंने कहा है कि पहली नज़र में निखिल वागले और संजय राउत के ट्वीट का मकसद सुप्रीम कोर्ट और खास तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की प्रतिष्ठा को कम करना लगता है. चीफ जस्टिस की तरफ से राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं को मुलाकात का समय न मिलने के बाद निखिल वागले और संजय राउत ने विवादित ट्वीट किए थे.
वागले ने निहायत आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. वहीं राउत ने कहा था कि जज बीजेपी नेताओं की पार्टियों में जाते हैं. उनके साथ बैडमिंटन खेलते हैं.
अटॉर्नी जनरल ने माना, राउत की बातें तथ्यहीन हैं
अटॉर्नी जनरल ने माना है कि राउत ने जो बातें कही हैं, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है. उन्होंने गलत तरीके से पेश की गई जजों की एक पुरानी तस्वीर के आधार पर टिप्पणी की. दिल्ली हाई कोर्ट उस तस्वीर को हटाने का आदेश दे चुका है. ऐसे में उसके आधार बयान देना प्रथमदृष्टया न्यायपालिका को विवादों में डालने का प्रयास लगता है.
हालांकि, मुकदमे के लिए अटॉर्नी जनरल की मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि दोनों दोषी साबित हो गए हैं. आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी. एक वकील की तरफ से लीगल नोटिस मिलने के बाद वागले ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी थी और इस पर माफी भी मांगी थी.
