पाकिस्तान एकसाथ कई मोर्चों पर सुलग रहा है. एकतरफ पीओके में जारी बगावत ने शहबाज सरकार की नींद उड़ा रखी है तो बलूचिस्तान में कंट्रोल फिसलने और पाक गृह मंत्री के हालिया बयानों से पड़ोसी मुल्क में भूचाल आ गया. क्या पाकिस्तान में हो रहे हालिया डेवलेपमेंट से तख्तापलट की आशंका दिख रही है और आसिम मुनीर पावर अपने हाथ में लेना चाहते हैं? डिफेंस एक्सपर्ट कर्नल टीपी त्यागी ने इस पर बड़ा बयान दिया है.
कर्नल त्यागी ने कहा, ‘पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति से हर कोई वाकिफ है. पीओके में दो महीने से ज्यादा समय से प्रोटेस्ट चल रहा है. दूसरी तरफ, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने भी ‘रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’ की घोषणा कर दी है, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के वजीरिस्तान में पाकिस्तान का नहीं बल्कि ‘तहरीक तालिबान पाकिस्तान’ का राज चलता है. पाकिस्तानी सरकार के पावरफुल गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने यह कह दिया कि पाकिस्तान का सिस्टम कोलैप्स हो चुका है’
क्या बोले डिफेंस एक्सपर्ट?
उन्होंने आगे कहा, ‘हो सकता है कि पाकिस्तान की सरकार को इशारा हो कि वो बदलाव के लिए फील्ड मार्शल मुनीर को ही निमंत्रण दें और मुनीर फिर पाकिस्तान की कमांड को संभालें. यानी ये तख्ता पलट नहीं तख्ता के लिए निमंत्रण होगा.’
त्यागी के मुताबिक, ‘आसिम मुनीर का मानना है कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूहों को पूरी तरह कंट्रोल करना संभव नहीं है. TTP 40 से अधिक कबीलों का समूह है, जिनका साझा मकसद पाकिस्तानी सेना को खत्म करना है. इस स्थिति से निपटने के लिए मुनीर की रणनीति इन प्रांतों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटने की है, ताकि उन्हें कंट्रोल करना आसान हो सके.’
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आसिम मुनीर की क्या रणनीति?
27वें संवैधानिक संशोधन के बाद मुनीर तीनों सेना के कमांडर और फील्ड मार्शल बन चुके हैं. उन्हें आजीवन विशेषाधिकार प्राप्त हैं और उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती. डिफेंस एक्सपर्ट के मुताबिक, 2030 में रिटायर होने के बाद की स्थिति को देखते हुए वे पीओके, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की अशांति का फायदा उठाकर ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं, जहां सरकार उन्हें खुद राष्ट्रपति बनने का निमंत्रण दे.’
मुनीर के पावर में आने पर क्या होंगी चुनौती
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘अगर मुनीर राष्ट्रपति बनते हैं तो उनके सामने कई बड़ी मुश्किलें होंगी. अभी तक आर्थिक विफलता की जिम्मेदारी नागरिक सरकार पर डाली जा सकती है, लेकिन राष्ट्रपति बनने पर सारी जवाबदेही मुनीर की होगी. सेना के भीतर, विशेष रूप से निचले रैंकों में, विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि कई अधिकारी पहले ही इस्तीफा दे रहे हैं या देश छोड़ रहे हैं. जनता पहले से ही उनके खिलाफ है और राष्ट्रपति पद संभालने से उनके प्रति जन-आक्रोश और बढ़ सकता है.’
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