कैथोलिक चर्च के प्रमुख पोप लियो XIV को फेफड़ों का कैंसर होने की पुष्टि हुई है. मंगलवार को रोम के जेमेली अस्पताल में उनकी सर्जरी की गई, जिसमें डॉक्टरों ने उनके दाहिने फेफड़े का निचला हिस्सा निकाल दिया. वेटिकन की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के मुताबिक, जांच में उन्हें लंग एडेनोकार्सिनोमा होने की पुष्टि हुई. ऑपरेशन से पहले की जांच में भी इस बीमारी की आशंका जताई गई थी. करीब 90 मिनट तक चली सर्जरी सफल रही और इसमें कोई जटिलता सामने नहीं आई. हालांकि, कैंसर किस चरण में है और आगे किस तरह का इलाज किया जाएगा, इस बारे में अभी अंतिम जानकारी नहीं दी गई है
PM मोदी ने सर्जरी सफल होने पर खुशी जताई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप लियो XIV की सर्जरी सफल होने पर खुशी जताई है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पोप के जल्द और पूरी तरह स्वस्थ होने की कामना की. पीएम मोदी ने लिखा, “यह जानकर खुशी हुई कि परम पावन पोप लियो XIV की बीती रात हुई सर्जरी सफल रही. मैं उनके शीघ्र और पूर्ण स्वस्थ होने के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य की निरंतर कामना करता हूं.”.
जांच में हुई कैंसर की पुष्टि
वेटिकन के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान ऊतक की जांच से लंग एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि हुई. यह फेफड़ों के कैंसर का एक आम प्रकार है. डॉक्टरों ने कैंसर से प्रभावित हिस्से को पूरी तरह निकालने के उद्देश्य से दाहिने फेफड़े का निचला लोब हटा दिया. मेडिकल रिपोर्ट में इसे कैंसरग्रस्त ऊतक को पूरी तरह निकालने के लिए की गई सर्जरी बताया गया है.
सर्जरी के बाद पोप होश में आ गए और कुछ समय निगरानी में रखने के बाद उन्हें अस्पताल के कमरे में वापस भेज दिया गया. वह करीब तीन घंटे तक ऑपरेशन थिएटर में रहे, जबकि वास्तविक सर्जरी लगभग 90 मिनट चली.
अभी कीमोथेरेपी पर फैसला नहीं
वेटिकन ने आगे के इलाज को लेकर कोई निश्चित योजना साझा नहीं की है. फिलहाल डॉक्टर कीमोथेरेपी या अन्य उपचार शुरू करने की बात नहीं कर रहे हैं. आगे का फैसला अतिरिक्त जांच के नतीजों पर निर्भर करेगा.
कैंसर के शरीर में फैलने का पता लगाने के लिए लिम्फ नोड्स की भी जांच की जाती है. पोप के मामले में इन जांचों के नतीजे अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. इनके आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकेंगे कि कैंसर केवल फेफड़े के एक हिस्से तक सीमित था या शरीर के अन्य हिस्सों तक भी पहुंचा है.
कैंसर विशेषज्ञ ने क्या बताया?
जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के लोम्बार्डी कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के फेफड़ों के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. स्टीफन लियू के मुताबिक, एडेनोकार्सिनोमा फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है और इसके ठीक होने की संभावना भी अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है. हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल बीमारी के प्रकार की जानकारी पर्याप्त नहीं है. यह जानना भी जरूरी है कि ट्यूमर कितना बड़ा है, फेफड़े में एक गांठ है या कई और लिम्फ नोड्स प्रभावित हुए हैं या नहीं.
डॉक्टर के मुताबिक, यदि कैंसर फैलने की पुष्टि होती है, तो आगे के उपचार का फैसला करने के लिए और जांच करनी होगी. इलाज के विकल्पों में कीमोथेरेपी, कीमोथेरेपी के साथ इम्यूनोथेरेपी या कुछ विशेष प्रकार के कैंसर के लिए इस्तेमाल होने वाली लक्षित दवाएं शामिल हो सकती हैं.
अस्पताल पहुंचे पोप, समर्थकों का किया अभिवादन
71 वर्षीय पोप मंगलवार को रोम के जेमेली अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर गए. इस दौरान बाहर उनका इंतजार कर रहे लोगों की ओर उन्होंने हाथ हिलाकर अभिवादन किया. वेटिकन के अनुसार, सर्जरी अस्पताल के प्रमुख थोरैसिक सर्जन डॉ. स्टेफानो मार्गारितोरा के नेतृत्व वाली टीम ने की.
पोप ने अपने 17 महीने के कार्यकाल में पहली बार सार्वजनिक रूप से किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या की जानकारी साझा की है. रविवार को प्रार्थना के दौरान उन्होंने बताया था कि हाल की चिकित्सकीय जांच में उनके फेफड़े में एक सीमित क्षेत्र में गांठ मिली है. डॉक्टरों ने इसे शुरुआती चरण में पाया था और उसे निकालने की सलाह दी थी. वेटिकन ने सोमवार को पोप के 20 अक्टूबर तक के सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए थे. अस्पताल में उनके रहने की अवधि और आगे की दिनचर्या को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
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