कोलकाता के एक पंडाल में दुर्गा पूजा के दौरान भीड़ बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. इस हादसे में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि बारिश शुरू होने पर चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर इंतजार कर रही भीड़ अचानक आगे की ओर बढ़ी, जिससे कुछ लोग सड़क पर गिर गए और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री सरदवत मुखर्जी और वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे हैं.
एक युवक ने एबीपी न्यूज को बताया कि बहुत भीड़ थी. मेरे साथ तीन दोस्त थे. बाहर तेज बारिश हो रही थी. लोग आगे चल रहे थे. अचानक पीछे से धक्का लगा. आगे चल रहे सभी लोग गिर पड़े. सब एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए. आगे चल रहे लोग उठ नहीं पा रहे थे. उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका.
एक युवक ने एएनआई से बातचीत में कहा, ”भीड़ थी, धक्का-धक्की हुई. बहुत सारे लोग बेहोश भी हो गए थे.लोगों को बाइक पर ले जाया गया.” एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, ”हम भागे. हम नहीं कह सकते कि ये कैसे हुआ.”
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— ABP News (@ABPNews) October 17, 2026
प्रत्यक्षदर्शी ने मौजूदा हालात के बारे में बताया, ”कुचले जाने के कारण उन्हें बाहर निकालना संभव नहीं था. मेरे तीनों दोस्त जमीन पर कुचल गए. सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था. कई लोग बेहोश हो गए. मैं उन्हें बाहर नहीं निकाल पाया. सब लोग मेरा हाथ पकड़े हुए थे. तभी स्थानीय लोगों ने पंडाल के दूसरी तरफ से तोड़कर उन्हें बाहर निकाला.”
मैं खुद को बाहर नहीं निकाल पा रहा था- प्रत्यक्षदर्शी
एबीपी आनंदा के मुताबिक, एक अन्य शख्स ने कहा, ”मुझे करीब 40-45 मिनट तक सांस लेने में दिक्कत हुई. मैं खुद को बाहर नहीं निकाल पा रहा था. कई लोग मेरा हाथ और घड़ी पकड़कर मुझे खींच रहे थे. आखिरकार, स्थानीय लोगों ने पंडाल का एक हिस्सा तोड़ दिया. उसके बाद हम खुद को बाहर निकालने में कामयाब हुए.”
एक महिला ने कहा, “पंडाल में पुलिस नहीं थी. हमारी गाड़ियां वहां फंसी हुई है. सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए… कोई एम्बुलेंस नहीं है. इलाके के लोग अपने घरों से निकलकर अपनी गाड़ियों लेकर आए. एक तरह की अफरा-तफरी मच गई है.”
कुछ ने पूरी घटना में कुप्रबंधन का आरोप लगाया है. एक युवक ने कहा, “भीड़ को नियंत्रित क्यों नहीं किया गया? उन्होंने इसे होने क्यों दिया? पुलिस कहां गई? हम शव को निजी गाड़ी से ले जा रहे हैं. हम इसे ओला-उबर से ले जा रहे हैं. यहां न तो एम्बुलेंस है, न ही पुलिस.”
