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भगवान शिव के सामने हाथ जोड़ते समय क्यों नहीं खड़े होते बिल्कुल बीच में? जानें मंदिर से जुड़ी पुरानी परंपरा


शिव मंदिर की व्यवस्था में नंदी को शिवलिंग के सामने स्थापित किया जाता है. नंदी शिव के गणाध्यक्ष हैं और नंदी अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन में निरंतर स्थित होते हैं.

शैव परंपराओं में नंदी और शिवलिंग के बीच की दृष्टि रेखा को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है.  मान्यता है कि नंदी और शिवलिंग के ठीक बीच खड़े होकर दर्शन नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे नंदी की शिवजी के प्रति बनी दृष्टि बाधित होती है. इसलिए भक्त आमतौर पर नंदी के बगल से शिवलिंग के दर्शन करते हैं.

शैव परंपराओं में नंदी और शिवलिंग के बीच की दृष्टि रेखा को विशेष धार्मिक महत्व दिया गया है. मान्यता है कि नंदी और शिवलिंग के ठीक बीच खड़े होकर दर्शन नहीं करने चाहिए, क्योंकि इससे नंदी की शिवजी के प्रति बनी दृष्टि बाधित होती है. इसलिए भक्त आमतौर पर नंदी के बगल से शिवलिंग के दर्शन करते हैं.

पंरपरा के अनुसार सबसे पहले शिव जी के दर्शन आंखें खोलकर करें, फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और फिर आंखें बंद कर कुछ देर महादेव का ध्यान लगाएं.

पंरपरा के अनुसार सबसे पहले शिव जी के दर्शन आंखें खोलकर करें, फिर हाथ जोड़कर प्रार्थना करें और फिर आंखें बंद कर कुछ देर महादेव का ध्यान लगाएं.

शृंगदर्शन का भाव नंदी की तरह मन और दृष्टि को भगवान शिव पर एकाग्र करने से जुड़ा है. जैसे नंदी की दृष्टि हमेशा शिव पर रहती है, वैसे ही भक्त का मन भी शिव में एकाग्र हो, इसलिए ऐसा किया जाता है.

शृंगदर्शन का भाव नंदी की तरह मन और दृष्टि को भगवान शिव पर एकाग्र करने से जुड़ा है. जैसे नंदी की दृष्टि हमेशा शिव पर रहती है, वैसे ही भक्त का मन भी शिव में एकाग्र हो, इसलिए ऐसा किया जाता है.

योग परंपरा में ध्यान के लिए आंखें बंद कर ईश्वर से प्रार्थना करने की बात कही गई है.मान्यता है इससे भगवान के प्रति समर्पण की भावना एकाग्र होती है. ध्यान नहीं भटकता.

योग परंपरा में ध्यान के लिए आंखें बंद कर ईश्वर से प्रार्थना करने की बात कही गई है.मान्यता है इससे भगवान के प्रति समर्पण की भावना एकाग्र होती है. ध्यान नहीं भटकता.

Published at : 13 Aug 2026 12:23 PM (IST)

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