पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में शनिवार शाम दुर्गा पूजा के उत्सव के बीच चोरबागान दुर्गोत्सव समिति के पंडाल में भगदड़ जैसी स्थिति बनने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 25 लोग घायल हो गए. मरने वालों में दो बच्चे भी शामिल बताए गए हैं. हादसा महा सप्तमी के दिन हुआ, जब पंडाल में दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे.
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तेज बारिश, संकरी गली में बढ़ती भीड़, प्रवेश और निकास के रास्तों को लेकर भ्रम और माइक से की गई एक कथित गलत घोषणा ने हालात बिगाड़ने में भूमिका निभाई हो सकती है. हालांकि, हादसे की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.
संकरी गली में भीड़, बारिश से बढ़ा दबाव
हादसा शनिवार शाम करीब 7:15 से 7:40 बजे के बीच हुआ. पंडाल में प्रवेश के लिए लोग उत्तर कोलकाता की संकरी राधा माधव साहा लेन में जमा थे. इसी दौरान बारिश तेज हो गई. बारिश से बचने के लिए पंडाल के भीतर पहले से मौजूद लोगों के साथ-साथ बाहर खड़े श्रद्धालु भी अंदर जाने की कोशिश करने लगे.
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— ABP News (@ABPNews) October 18, 2026
भीड़ का दबाव बढ़ने से धक्का-मुक्की शुरू हो गई. पंडाल के भीतर मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया, क्योंकि आगे की ओर भीड़ रास्ता रोक रही थी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, निकास द्वार के पास सीढ़ियों पर कई लोग गिर पड़े और पीछे से आ रहे लोगों के नीचे दब गए.
हादसे के बाद पंडाल की लाइटें बंद कर दी गईं और लोगों की आवाजाही रोक दी गई. सुरक्षा के मद्देनजर शहर के कुछ अन्य दुर्गा पूजा पंडाल भी बंद कराए गए.
माइक की घोषणा और सीटी बजने से भगदड़ की आशंका
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या भीड़ को नियंत्रित करने में चूक, प्रवेश और निकास के रास्तों को लेकर भ्रम तथा भारी बारिश ने हादसे को गंभीर बनाया. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी आशंका जताई कि पूजा समिति की ओर से की गई किसी भ्रामक घोषणा से लोगों में भ्रम पैदा हुआ होगा. निजी सुरक्षा गार्डों की ओर से सीटी बजाए जाने से भी श्रद्धालुओं के अचानक आगे बढ़ने की आशंका जताई गई है.
प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि पंडाल में प्रवेश, निकास और भीड़ की आवाजाही को लेकर घोषणाएं स्पष्ट नहीं थीं. इससे व्यस्त समय में लोग समझ नहीं पाए कि उन्हें किस दिशा में जाना है.
12 लोग हिरासत में, सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
पुलिस ने हादसे के सिलसिले में पूजा आयोजन समिति के सदस्यों समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया है. उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भीड़ किस वजह से बेकाबू हुई और सुरक्षा इंतजामों में कोई चूक हुई थी या नहीं.
कोलकाता पुलिस की एंटी-राउडी सेक्शन ने घटनास्थल की सीसीटीवी फुटेज जुटाई है. पुलिस फुटेज की जांच के साथ ही आयोजन में तैनात निजी सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों की जानकारी भी जुटा रही है. घटनास्थल पर ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जाएगी.
शनिवार देर रात फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए. जांच अधिकारियों के मुताबिक, लापरवाही की जिम्मेदारी आयोजकों की थी या किसी अन्य विभाग अथवा सुरक्षा एजेंसी की, यह तथ्यों के आधार पर तय किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने हादसे की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की घोषणा की है. इसमें स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ), अपराध जांच विभाग (सीआईडी) और अन्य विभागों के सदस्य शामिल होंगे.
सभी प्रमुख पंडालों की होगी जांच
हादसे के बाद राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के प्रमुख दुर्गा पूजा पंडालों में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कराने का फैसला किया है. इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है. मुख्यमंत्री ने आयोजकों से सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है.
उन्होंने पंडालों में निकास द्वार चौड़े रखने, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने और रस्सियों से बनाए गए ऐसे अस्थायी घेरों को हटाने पर जोर दिया, जिनसे लोगों की आवाजाही बाधित होती है. जहां जटिल संरचनाओं के कारण रास्ते संकरे हो रहे हैं, वहां आयोजकों को अंदर के हिस्से में ही पूजा की रस्में सीमित रखने और बाहर एलईडी स्क्रीन लगाने की सलाह दी जा सकती है.
घायलों से मिले मुख्यमंत्री अधिकारी
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचकर भर्ती घायलों का हाल जाना. मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि पूरे मामले की पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी. उन्होंने अन्य पूजा समितियों से भी अपील की कि वे श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था करें.
मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और सरकारी नौकरी
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को ग्रुप-डी की सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की. उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की.
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