- यह बयान महिला सशक्तिकरण पर नई बहस छेड़ेगा.
देश की संसद में महिला आरक्षण 33 फीसदी को लेकर जारी राजनीतिक कवायद के बीच बरेली से मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने जहां सरकार के फैसले की सराहना की, वहीं महिलाओं के सियासत से दूर रहने की मजबूरी भी बताई.
आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महिला आरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आगे लाने का काम कर रही है, जिससे आने वाले समय में संसद में उनकी भागीदारी बढ़ेगी.
मौलाना ने यह भी कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने के बाद महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी और सियासत में अपनी भागीदारी दर्ज करा सकेंगी. यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में है.
मुस्लिम महिलाओं के लिए रखी राय
हालांकि उन्होंने मुस्लिम सियासत के संदर्भ में उन्होंने अलग दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर की राजनीति में काफी बदलाव आ चुका है और अब यह क्षेत्र संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और कई बार अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, ऐसे माहौल में महिलाओं के लिए सम्मान और सुरक्षा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
इसी को मजबूरी बताते हुए मौलाना ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को सियासत से दूर रहना ही बेहतर है. उनके अनुसार, इस्लाम महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देता है और उन्हें घर की जिम्मेदारियों के साथ सुरक्षित माहौल में रहने की सलाह देता है.
मुस्लिम महिला राजनीति पर हो सकती है बहस
मौलाना का यह बयान महिला आरक्षण और मुस्लिम सियासत के बीच एक अलग बहस को जन्म देता है, जहां एक ओर महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है.
यहां बता दें कि मौलाना शाहबुद्दीन अक्सर राजनीतिक और धार्मिक मामलों में टिप्पणी कर अपनी राय जाहिर करते हैं. जो कई बार विवादित भी हो जाती हैं. फ़िलहाल उनके इस बयान पर अभी किसी राजनीतिक दल की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.
