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‘मुंब्रा को हरा कर देंगे’ कहने वालीं AIMIM पार्षद के पिता भगवा पार्टी शिवसेना में पहुंचे


महाराष्ट्र की राजनीति में मुंब्रा एक बार फिर चर्चा में है. AIMIM की पार्षद सहर शेख, जिन्होंने ‘पूरा मुंब्रा आने वाले समय में हरा करना है’ वाले बयान से सुर्खियां बटोरी थीं, अब उनके पिता यूनुस शेख को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है. यूनुस शेख एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इतना ही नहीं, उन्हें पार्टी में एक अहम जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.

सहर शेख ठाणे महानगरपालिका के वार्ड नंबर 30 से AIMIM के टिकट पर चुनाव जीतकर पार्षद बनी हैं. चुनाव के बाद उनके एक भाषण का वीडियो चर्चा में आया था. इसमें उन्होंने पूरे मुंब्रा को हरा करने की बात कही थी. उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई थी और वह महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का चेहरा बन गई थीं. अब उनके पिता यूनुस शेख के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने से यह मामला फिर सुर्खियों में है.

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शिंदे की शिवसेना में मिली बड़ी जिम्मेदारी

यूनुस शेख को शिवसेना के ठाणे के पदाधिकारियों ने पार्टी में शामिल कराया. इसके बाद उन्हें कलवा-मुंब्रा विधानसभा क्षेत्र में केबल ऑपरेटरों से जुड़े संगठन ‘केबल सेना’ का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.

सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी नियुक्ति शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के आदेश पर की गई है. नियुक्ति पत्र में भी इसका जिक्र बताया गया है. इस घटनाक्रम के बाद ठाणे के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.

बेटी AIMIM में, पिता शिंदे सेना के साथ

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि सहर शेख AIMIM से पार्षद हैं, जबकि उनके पिता ने हिंदुत्व की राजनीति करने वाली एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया है. खासकर तब, जब सहर शेख अपने बयान को लेकर पहले ही सुर्खियों में रह चुकी हैं.

महाराष्ट्र की राजनीति में क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

मुंब्रा ठाणे का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है, जहां अलग-अलग दलों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश जारी रहती है. ऐसे में यूनुस शेख को शिंदे की शिवसेना में जिम्मेदारी मिलना स्थानीय स्तर पर अहम हो जाता है.

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अब देखना होगा कि इस घटनाक्रम पर AIMIM और दूसरे राजनीतिक दलों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है. फिलहाल, सहर शेख के चर्चित बयान और उनके पिता के शिवसेना में शामिल होने ने मुंब्रा की राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.



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