बॉलीवुड के दिग्गज डायरेक्टर सुभाष घई ने पीएम मोदी से अपनी 17 साल पुरानी मुलाकात का एक किस्सा सुनाया है. सुभाष घई ने बताया कि उन्होंने साल 2009 में पीएम मोदी से मुलाकात की थी उस वक्त वो गुजरात के सीएम हुआ करते थे. तब सुभाष घई को पीएम मोदी ने इस तरह ट्रीट किया था जिसे वे आज तक नहीं भूल पाए हैं. उस वक्त पीएम ने डायरेक्टर को घर पर आकर नाश्ता करने के लिए भी कहा था.
पीएम मोदी ने कहा था- घर पर आकर नाश्ता करना
सुभाष घई का एक वीडियो मोदी स्टोरी नाम के एक्स हैंडल पर शेयर किया गया है. 2009 में उन्होंने पीएम से अपने फिल्म और मीडिया इंस्टीट्यूट ‘व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल’ के विस्तार को लेकर मुलाकात की थी. वीडियो में सुभाष घई कह रहे हैं, ‘2009 में मैं जब गुजरात गया था मैं उनके सेक्रेटरी को मिला था. तो उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर मोदी जी बॉम्बे में हैं. तो उन्होंने (पीएम मोदी) कहा कि सुभाष जी को रिक्वेस्ट कीजिए कि आज रात रुक जाए. कल सुबह वो मेरे घर पर आकर नाश्ता करेंगे. दूसरे दिन नाश्ते पर मुलाकात हुई.’
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पीएम मोदी को दिया था प्रजेंटेशन
सुभाष घई ने आगे कहा, ‘हमने उनको प्रजेंटेशन दी. जब मैं उनको प्रजेंटेशन दे रहा था तो मैंने कहा था कि भारतीय संस्कृति को एजुकेशन में किस तरह से लाया जा सकता है. जब तक कलात्मक दृष्टि से एजुकेशन नहीं होगी बच्चों का विकास नहीं हो पाएगा. चाहे वो गुजरात की संस्कृति हो, बंगाल की हो या फिर पंजाब की. ये सिनेमा के जरिए हो सकता है.’
When Subhash Ghai met PM Modi, he expected bureaucracy, instead he got speed-run execution.
Watch the iconic director explain how a visionary idea went from pitch to reality on the fast track!#Modistory #SubhashGhai pic.twitter.com/S5H5ehL4pV
— Modi Story (@themodistory) August 19, 2026
सुभाष घई ने मांगी थी जमीन
सुभाष ने आगे कहा, ‘पीएम मोदी ने देखा तो उन्हें काफी अच्छा लगा. उनके साथ दो सेक्रेटरी थे. उन्होंने पूछा था कि आपको क्या चाहिए? मैंने कहा मुझे एयरपोर्ट के पास थोड़ी जमीन चाहिए. जहां मेरे टीचर्स भी आ सके. तो पीएम मोदी ने कहा कि मैंने इनसे कह दिया है. आपको जो भी जगह अच्छी लगे आप चुन लीजिए. हम चाहते हैं कि आप अहमदाबाद में आकर इंस्टीट्यूट खोले और सुनिए दूसरी बात मेरे सेक्रेटरी अगर कुछ भी गड़बड़ या लेट करें तो मुझे सीधा मुझे फोन कीजिए.
मैं हंसने लगा और कहा कि सर ये तो सीनियर ऑफिसर्स हैं. तो उन्होंने कहा कि इनके पास काम बहुत है. कभी भूल भी जाते हैं. इसकी महत्ता जो आपने बताई है वो मैं समझ सकता हूं. मैं चाहता हूं कि ये बने यहां पर. ये बात जो उन्होंने कही वो मेरे लिए बहुत महत्वूर्ण थी. मुझसे किसी चीफ मिनिस्टर ने ये बात नहीं कही.’
