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‘मैं डींग नहीं मार रहा, किसी…’, नोबेल के लिए भारत-पाकिस्तान का ट्रंप ने फिर लिया नाम


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी पेश की है.ऐसी अपीलें वो पिछले कई सालों से करते आ रहे हैं. इस बार उन्होंने व्हाइट हाउस से यह बात कही और 8 युद्धों को सुलझाने के अपने रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि एक और बड़ी कामयाबी मिल सकती है.

बुधवार को चुनाव प्रचार के बाद वॉशिंगटन लौटने पर ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने कहा, “मैंने ऐसे काम किए हैं जो किसी और ने कभी नहीं किए. मैं डींग नहीं मार रहा, बस आपको असलियत बता रहा हूं. शायद ही किसी राष्ट्रपति ने कभी कोई युद्ध सुलझाया हो, मैंने 8 युद्ध सुलझाए हैं.”

एक और युद्ध सुलझाने वाले हैं
ट्रंप ने अपनी इस बातचीत में ईरान से युद्ध खत्म होने की हिंट भी दे दी है. उन्होंने कहा, ”उनकी लिस्ट में जल्द ही एक और संघर्ष जुड़ सकता है, जबकि ईरान के साथ एक और युद्धविराम की दिशा में बहुत कम प्रगति दिखाई दी है.”

ट्रंप की ये बातें नोबेल पुरस्कार पाने की कोई नई कोशिश नहीं थीं. हालांकि वे बार-बार यह कहते रहे हैं कि अपने डिप्लोमैटिक रिकॉर्ड की वजह से वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं, लेकिन उनके इस खत्म किए गए युद्धों की संख्या के दावों पर फैक्ट-चेकर्स ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जिन संघर्षों का वे जिक्र करते हैं, उनमें से कई औपचारिक रूप से युद्ध नहीं थे और अलग-अलग विवादों में अमेरिका की भूमिका काफी अलग-अलग थी.

ट्रंप की नोबेल पुरस्कार पाने की इच्छा बहुत पुरानी है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने बार-बार उत्तर कोरिया के साथ अपनी कूटनीतिक कोशिशों की ओर ध्यान खींचा. 2018 में, नॉर्वे के दो राजनेताओं ने कहा कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद उन्होंने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया था.

ऑपरेशन सिंदूर का करते हैं जिक्र
ट्रंप  बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने या समझौतों तक पहुंचने में अमेरिका की भूमिका का जिक्र किया है.लेकिन उनके दावों का सीधे तौर पर खंडन किया गया है. भारत ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने में अमेरिका ने मदद की थी. विदेश मंत्रालय ने कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के दौरान “अमेरिका का कोई दखल नहीं था” और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच बनी थी. इसके बावजूद, ट्रंप बार-बार इसी बात को दोहराते रहे हैं.

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