- रेवंत रेड्डी ने महिला आरक्षण बिल पर भाजपा की नीयत पर सवाल उठाए।
- कांग्रेस ने महिलाओं को मतदान अधिकार दिया, भाजपा ने नेतृत्व में मौका नहीं दिया।
- भाजपा ने 50 साल में एक भी महिला अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया।
- रेड्डी के बयान से महिला प्रतिनिधित्व पर राष्ट्रीय बहस तेज हुई।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के पारित न होने को लेकर शनिवार (18 अप्रैल, 2026) को केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला किया है. उन्होंने कहा कि लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जो घटनाक्रम सामने आया है, वह सिर्फ राजनीतिक हार नहीं, बल्कि भाजपा की नीयत की हार को दर्शाता है.
कांग्रेस ने महिलाओं को दिए अधिकार, BJP ने नहीं दिया मौकाः रेड्डी
नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी ने महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए कहा कि इस देश में महिलाओं को मतदान का अधिकार कांग्रेस ने दिया था और महिला सशक्तिकरण की दिशा में लगातार काम किया है. इसके विपरीत उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के इतिहास में महिलाओं को नेतृत्व के शीर्ष पदों पर पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया.
उन्होंने कहा कि 6 अप्रैल, 1980 को स्थापित हुई भाजपा को करीब 50 साल होने वाले हैं, लेकिन अब तक पार्टी ने 15 बार अध्यक्ष नियुक्त किए हैं और इनमें एक भी महिला को यह जिम्मेदारी नहीं दी गई. उन्होंने वरिष्ठ नेताओं लाल कृष्ण आडवानी और मुरली मनोहर जोशी का उदाहरण देते हुए कहा कि कई नेताओं को बार-बार मौका मिला, लेकिन महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व में स्थान नहीं दिया गया.
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BJP संगठन में किसी महिला को नहीं मिला शीर्ष नेतृत्वः रेड्डी
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में जनरल सेक्रेटरी (ऑर्गेनाइजेशन) जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी आज तक किसी महिला को नियुक्त नहीं किया गया है. उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि भाजपा की सोच और नीतियां महिलाओं को लेकर गंभीर नहीं हैं.
रेवंत रेड्डी ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भाजपा की नीयत पर सवाल उठते हैं, क्योंकि अगर वास्तव में महिलाओं के प्रति प्रतिबद्धता होती, तो पार्टी अपने संगठन में भी महिलाओं को समान प्रतिनिधित्व देती.
महिला प्रतिनिधित्व को लेकर देश में बहस तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान महिला आरक्षण पर जारी राष्ट्रीय बहस के बीच आया है, जिससे इस मुद्दे को और राजनीतिक रंग मिल सकता है. एक ओर जहां भाजपा सरकार महिला आरक्षण को ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और नीयत पर सवाल उठा रहा है. फिलहाल, रेवंत रेड्डी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है और महिला प्रतिनिधित्व को लेकर बहस को तेज कर दिया है.
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