महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने स्पष्ट कहा कि लोकसभा में बिल का गिरना सरकार की हार नहीं, बल्कि देश की महिलाओं को मिलने वाले अधिकारों का विरोध है. सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने इस मुद्दे को सीधे महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़ते हुए विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए.
‘महिलाओं के अधिकार के खिलाफ खड़ा है विपक्ष’
कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक भूल है. उनके अनुसार, यह कदम महिलाओं को उनका हक देने से इनकार करने जैसा है. उन्होंने जोर दिया कि इस रुख का असर आने वाले समय में विपक्ष को भुगतना पड़ेगा.
मौजूदा सीटों पर आरक्षण के प्रस्ताव को नकारा
सूत्रों के अनुसार, सरकार फिलहाल मौजूदा 543 सीटों पर सीधे आरक्षण लागू करने के लिए नया विधेयक लाने के पक्ष में नहीं है. विपक्ष और कांग्रेस की इस मांग को सरकार ने खारिज करते हुए इसे राजनीतिक बयानबाजी बताया है.
यह भी पढ़ें: लोकसभा की 543 सीटों में क्यों नहीं लागू हो सकता महिला आरक्षण, सरकार और विपक्ष के क्या हैं दावे?
’50 साल में क्यों नहीं दिया आरक्षण?’
प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहते थे, तो पिछले 50 वर्षों में उन्होंने ऐसा कदम क्यों नहीं उठाया. उन्होंने इसे विपक्ष की नीयत पर सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया.
गांव-गांव तक पहुंचाने का निर्देश
पीएम मोदी ने कहा कि यह संदेश देश के हर गांव तक पहुंचाया जाना चाहिए कि विपक्ष की सोच महिलाओं के प्रति नकारात्मक है. उन्होंने पार्टी और सरकार के नेताओं को इस मुद्दे पर जनता के बीच जाकर सच्चाई रखने की बात कही.
‘राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी’
प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी कि महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने का राजनीतिक नुकसान विपक्ष को उठाना पड़ेगा. उनके मुताबिक, जनता इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है और इसका असर चुनावी राजनीति पर भी पड़ेगा.
विपक्ष पर ‘बचाव की राजनीति’ का आरोप
बैठक में यह भी कहा गया कि विपक्ष अब अपने रुख को सही ठहराने और उसे छिपाने की कोशिश कर रहा है. पीएम मोदी के अनुसार, यह दर्शाता है कि विपक्ष खुद अपने फैसले को लेकर असहज है.
