उज्बेकिस्तान में आयोजित 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन यानी IPU सम्मेलन में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने डिजिटल अधिकारों और तकनीक तक पहुंच को लेकर भारत का अनुभव साझा किया. ‘डिजिटल युग में डिजिटल एक्सेस और अधिकार’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित किया है कि बड़े स्तर पर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ समाज के हर वर्ग को उनसे जोड़ना भी संभव है.
राघव चड्ढा ने भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल इस्तेमाल का उदाहरण देते हुए UPI का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल कुछ लोगों को सुविधा देना नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका फायदा समाज के उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या डिजिटल संसाधनों से दूर हैं. उन्होंने भारत के डिजिटल विकास को इस बात का उदाहरण बताया कि सही तकनीक और व्यापक पहुंच के जरिए बड़ी आबादी को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सकता है.
#WATCH | BJP MP Raghav Chadha, speaking at the 12th IPU Conference in Uzbekistan on ‘Digital Access & Rights in a Digital Era’, said India has shown that digital scale and inclusion can go hand in hand.
He highlighted India’s digital growth and UPI, stressing the need for… pic.twitter.com/x8TbOIhSNR
— ANI (@ANI) September 6, 2026
डिजिटल सुविधा के साथ अधिकारों की सुरक्षा भी जरूरी
चड्ढा ने कहा कि डिजिटल दुनिया का विस्तार केवल इंटरनेट, मोबाइल और ऑनलाइन सेवाओं की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए. इसके साथ लोगों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है. उनके मुताबिक, तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिससे आम नागरिक को बेहतर सेवाएं और नए अवसर मिलें, लेकिन उसकी निजता और अधिकारों से समझौता न हो. डिजिटल व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा और समान पहुंच दोनों जरूरी हैं.
गरीब जिलों के लोगों तक पहुंचना असली चुनौती
राघव चड्ढा ने डिजिटल विकास को परखने के लिए एक सवाल भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि असली परीक्षा तब होगी, जब देश के सबसे पिछड़े या गरीब जिलों में रहने वाला व्यक्ति, जो बेहद सस्ता मोबाइल फोन इस्तेमाल करता है, उसे भी वही डिजिटल सुविधा, सुरक्षा और अवसर मिलें जो किसी बड़े शहर में रहने वाले व्यक्ति को मिलते हैं. उन्होंने इस अंतर को कम करने की जरूरत बताई और कहा कि डिजिटल प्रगति का फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचना चाहिए.
डिजिटल युग में समान अवसर पर जोर
चड्ढा के मुताबिक डिजिटल तकनीक लोगों के बीच अवसरों का अंतर कम करने का माध्यम बन सकती है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इंटरनेट, डिजिटल सेवाओं और सुरक्षित तकनीक तक पहुंच केवल शहरों या आर्थिक रूप से मजबूत लोगों तक सीमित न रहे. उन्होंने कहा कि डिजिटल विकास की सफलता का सही पैमाना यही है कि तकनीक कितने लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाती है और कितने लोगों को नए अवसरों से जोड़ती है. भारत का अनुभव इस दिशा में दुनिया के दूसरे देशों के लिए भी एक उदाहरण हो सकता है.
