राजस्थान में चल रहे नगर निकाय चुनावों में तमाम जगहों पर फिल्मी कहानी जैसे ड्रामे देखने को मिल रहे हैं. ऐसी ही एक घटना कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के चुनाव क्षेत्र वाले जिले टोंक में देखने को मिली है. आरोप है कि यहां की दूनी नगर पालिका में चेयरमैन पद की कांग्रेस उम्मीदवार को राजस्थान की पुलिस ने कल यानी बुधवार को नामांकन के बाद टोल प्लाजा पर घेराबंदी कर अपनी हिरासत में ले लिया.
पुलिस कांग्रेस की महिला उम्मीदवार अर्चना बडगूजर को लेकर बीजेपी के किसी नेता के घर गई. यहां महिला प्रत्याशी के पति और पड़ोसी के साथ ही ड्राइवर भी पहुंच गए. महिला प्रत्याशी अर्चना बडगूजर ने यहां अपना वीडियो बनवाया, जिसमें वह साफ तौर पर कह रही हैं कि अगर उन्हें नहीं छोड़ा गया और उनके समर्थक पार्षदों को परेशान किया गया तो वह फांसी लगाकर अपनी जान दे देंगी.
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महिला प्रत्याशी का अता-पता नहीं
परिवार के कुछ लोगों के पहुंचने पर पुलिस वहां से भी अर्चना को अपने साथ कहीं और ले गई. तबसे उनका कोई पता नहीं चल रहा है. परिवार ने टोल प्लाजा पर घेराबंदी कर पुलिस द्वारा अर्चना बडगूजर को जबरन हिरासत में लिए जाने और बीजेपी नेता के घर पर फांसी लगाकर जान देने की धमकी दिए जाने के वीडियो को अब वायरल कर दिया है.
एक वीडियो में अर्चना बडगूजर आसपास खड़े पुलिस वालों को यह कहती सुनाई दे रही है कि अगर उनके साथ तानाशाही की गई और उन्हें छोड़ नहीं गया या फिर उनके समर्थक पार्षदों को परेशान किया गया तो वह फांसी लगाकर अपनी जान दे देंगी. बहरहाल कांग्रेस की महिला चेयरमैन प्रत्याशी अर्चना बडगूजर को पुलिस द्वारा बिना किसी वजह के कस्टडी में लिए जाने की घटना के करीब 30 घंटे बीत चुके हैं.
30 घंटे बाद भी उनका कोई पता नहीं चलने पर उनके परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, पड़ोसी और समर्थक जयपुर में कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय पहुंच गए. यहां कांग्रेस के स्टेट मीडिया कॉर्डिनेटर और मुख्य प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने परिवार वालों के साथ प्रेस कांफ्रेंस की. स्वर्णिम चतुर्वेदी ने पूरी घटना को बताया और साथ ही यह आरोप भी लगाया कि राजस्थान में यह इकलौती घटना नहीं है.
कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी तमाम जगहों पर पुलिस का इस्तेमाल कर विपक्षी खेमे के पार्षदों को डरा धमका रही है. उन्हें चुनाव से दूर रखने की कोशिश कर रही है. उन पर बीजेपी को समर्थन करने का दबाव बनाया जा रहा है. कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रत्याशी अर्चना बडगूजर के दोनों छोटे बच्चे और परिवार की दूसरी महिलाएं फूट-फूट कर रही.
उन्होंने हाथ जोड़कर मीडिया से इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई. साफ तौर पर कहा कि घटना के बाद से उनके घर पर मातम का माहौल है. परिवार किसी अनहोनी की आशंका से डरा हुआ है. अर्चना की सास सूरजा देवी और घटना के वक्त उनके साथ रहे पड़ोस के दिनेश चौधरी ने पूरी कहानी बताई. दिनेश चौधरी के मुताबिक अर्चना को पुष्कर से टोंक आते वक्त अजमेर जिले के केकड़ी इलाके के सरवाड़ टोल प्लाजा पर पुलिस ने गाड़ियां लगाकर रोका.
कहानी आया दिलचस्प ट्विस्ट
फिल्मों सरीखी इस पूरी कहानी में एक ट्विस्ट और है. दरअसल अर्चना बडगूजर बीजेपी के टिकट पर पार्षद का चुनाव जीती. वह चेयरमैन पद पर पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ना चाहती थी. बीजेपी ने उनकी जगह अर्चना बलाई नाम की पार्षद को चेयरमैन पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया. इसके बाद अर्चना बडगूजर ने कांग्रेस पार्टी से संपर्क किया और अपने साथ कुछ अन्य पार्षद होने का भी दावा किया.
कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी की बागी अर्चना बडगूजर को अपना अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर उन्हें पार्टी का सिंबल दे दिया. ऐसे में बीजेपी को लगा कि साफ बहुमत होने के बावजूद वह इस नगर पालिका में अपना चेयरमैन नहीं बन पाएगी. टोंक जिले की दूनी नगरपालिका में 20 वार्ड है. सोमवार को पार्षदों के वोटो की गिनती में यहां बीजेपी को 12, कांग्रेस को 6 और निर्दलीयों को दो सीटें मिली थी. यहां बीजेपी को बहुमत के आंकड़े 11 से एक सीट ज्यादा मिली थी.
अर्चना बडगूजर ने किया था ये दावा
अर्चना बडगूजर ने कांग्रेस नेताओं से यह दावा किया था कि वह दोनों निर्दलीयों के साथ ही बीजेपी के चार पार्षदों को अपने साथ लेकर आएंगी. बहरहाल अब देखना यह होगा कि इस मामले में राजस्थान पुलिस का अगला कदम क्या होता है.
मामले के तूल पकड़ने के बाद क्या वह कांग्रेस प्रत्याशी अर्चना बडगूजर को छोड़ता है या फिर शुक्रवार को वह अपना नामांकन वापस लेने के लिए सामने आती है. वैसे इस तरह के तमाम घटनाक्रम राजस्थान में कई जगहों पर देखने को मिल रहे हैं.
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