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वायु सेना का हुआ था इस्तेमाल…, किरेन रिजिजू का राहुल के आरोपों पर करारा पलटवार


राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर आक्रामक रुख अपनाने वाले राहुल गांधी के आरोपों पर केंद्र सरकार की तरफ से करारा पलटवार किया गया है. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कांग्रेस शासन के दौरान मिजोरम में लोगों के खिलाफ वायुसेना के इस्तेमाल की याद दिलाई.

रिजिजू ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश के नागरिकों की सुरक्षा और उनकी जिंदगी इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर छात्रों के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की तरफ से इसका फायदा उठाने की कोशिशों के बावजूद किसी की जान नहीं गई.

रिजिजू का राहुल गांधी पर पलटवार

उन्होंने आगे तेलंगाना आंदोलन (1969) का जिक्र करते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश में हुए इस आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार 369 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें से अधिकांश छात्र पुलिस गोलीबारी में मारे गए थे. इसके साथ ही उन्होंने तुर्कमान गेट विध्वंस और पुलिस फायरिंग (1976) का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली में आपातकाल के दौरान यह एक बड़ा टकराव था.

इसमें मृतकों की संख्या को लेकर विवाद है. पुलिस ने छह मौतों की बात स्वीकार की थी, जबकि गोलीबारी का आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी के हवाले से दिए गए बयानों सहित अन्य रिपोर्टों में यह संख्या 20 या उससे अधिक बताई गई है.

इसके अलावा, रिजिजू ने मुजफ्फरनगर नसबंदी विरोधी गोलीबारी (1976) का भी जिक्र किया. 18 अक्टूबर 1976 को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जबरन नसबंदी अभियान के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए थे, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला दी थीं. विभिन्न ऐतिहासिक वृत्तांतों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने का उल्लेख मिलता है. कुछ स्रोतों में यह संख्या करीब 50 बताई गई है.

मोगा आंदोलन का जिक्र

रिजिजू ने 1972 में हुए पंजाब के मोगा आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि सिनेमा टिकटों की कथित कालाबाजारी को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन बाद में झड़पों में बदल गया. पुलिस ने गोलीबारी की, जिसमें छात्रों और राहगीरों सहित चार लोगों की जान चली गई. उन्होंने गुजरात के नवनिर्माण आंदोलन (1973-74) का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह छात्रों के नेतृत्व में हुआ एक बड़ा आंदोलन था. इसके ऐतिहासिक ब्योरों में कुल 103 मौतों का उल्लेख है, जिनमें से 88 मौतें पुलिस गोलीबारी के कारण हुई थीं.

इसके अलावा, मध्य प्रदेश के मुलताई किसान आंदोलन (1998) का जिक्र करते हुए रिजिजू ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गोलीबारी की. शुरुआती रिपोर्टों में 17 मौतों की बात कही गई थी, जबकि बाद के आंकड़ों में मृतक किसानों की अंतिम संख्या 24 बताई गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान पुलिस गोलीबारी की ऐसी और भी कई घटनाएं हुई हैं. उन्होंने कहा कि ये उन प्रमुख आंदोलनों का ब्योरा हैं, जब कांग्रेस सरकार सत्ता में थी और पुलिस कार्रवाई में लोगों की मौत हुई थी. इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि हमारी सरकार ने सभी आंदोलनों के दौरान हमेशा अत्यधिक संयम बरता है.

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