FMGE 2026: विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना अनिवार्य होता है. हाल ही में संसद में FMGE के कम पास प्रतिशत को लेकर भी सवाल उठे. इसके जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि जून 2026 सत्र में परीक्षा का कुल पास प्रतिशत 12.78 प्रतिशत रहा. सरकार के अनुसार इस रिजल्ट के पीछे अलग-अलग देशों के मेडिकल पाठ्यक्रम, पढ़ाई की क्वालिटी और दूसरे कारण जिम्मेदार हैं. वहीं नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की 2025 की रिपोर्ट भी यह बताती है कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद ज्यादातर उम्मीदवारों को FMGE पास करने में कितना समय लगता है.
कितने समय में पास करते हैं ज्यादातर छात्र?
NBEMS उम्मीदवारों को इस आधार पर वर्गीकृत करता है कि उन्होंने विदेश से अपने मेडिकल डिग्री पूरी करने के कितने समय बाद NBEMS पास किया. दिसंबर 2025 सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार ऐसे रहे, जिन्होंने डिग्री पूरी करने के 6 महीने के से 1 साल के अंदर परीक्षा पास की. इस कैटेगरी में 6,326 उम्मीदवार सफल हुए. वहीं 1,156 उम्मीदवारों ने डेढ़ से दो साल के अंदर परीक्षा पास की. जबकि 1,061 उम्मीदवार 6 महीने के अंदर ही सफल हो गए, सत्र में कुल 10,264 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की, जिनमें से 8,543 इन्हीं तीन कैटेगरी से थे.
जून 2025 में अलग रहा ट्रेंड
जून 2025 सत्र में तस्वीर कुछ अलग रही. इस परीक्षा में सबसे ज्यादा 2,478 उम्मीदवारों ने डिग्री पूरी होने के 1 साल से डेढ़ साल के अंदर एफएमजीई पास किया. वहीं 921 उम्मीदवार 6 महीने के अंदर सफल हुए और 1,012 उम्मीदवारों को दो से ढाई साल का समय लगा. इस सत्र में कुल 6,709 उम्मीदवार सफल हुए, जिनमें से 4,411 इन्हीं तीन समय सीमाओं में परीक्षा पास करने वाले थे. NBEMS ने दोनों सत्रों के इस अंतर का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया, हालांकि माना जा रहा है कि परीक्षा देने के समय ग्रेजुएशन के बाद का गैप और रिपीट उम्मीदवारों की संख्या जैसी बातें इस अंतर की वजह हो सकती है.
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जून 2026 के रिजल्ट पर क्या बोली सरकार?
राज्यसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि जून 2026 एफएमईजी में कुल पास प्रतिशत 12.78 प्रतिशत रहा. सरकार के अनुसार पहली बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का पास प्रतिशत 35 प्रतिशत से ज्यादा था, जबकि लगभग 88 प्रतिशत अभ्यर्थी रिपीट कैंडिडेट थे. सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग देशों के मेडिकल पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण में अंतर भी परीक्षा परिणामों को प्रभावित करता है.
किन देशों के छात्रों का बेहतर प्रदर्शन रहा?
NBEMS की 2025 रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2025 सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार रूस से एमबीबीएस करने वाले रहे. इस सत्र में रूस से पढ़े 2,128 उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुए. वहीं जॉर्जिया ने टॉप देशों में सबसे ज्यादा 32.36 प्रतिशत पास प्रतिशत दर्ज किया. दूसरी ओर चीन से पढ़े छात्रों का पास प्रतिशत 14.26 प्रतिशत रहा, जो टॉप 5 देशों में सबसे कम था. वहीं जून 2025 सत्र में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवार चीन से एमबीबीएस करने वाले रहे. इस दौरान 1,043 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की. हालांकि पास प्रतिशत केवल 14.66 प्रतिशत रहा. इस सत्र में भी जॉर्जिया का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां पास प्रतिशत 27.68 प्रतिशत दर्ज किया गया.
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