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विपक्ष का हंगामा, संसद ठप! लोकसभा में 19%, राज्यसभा में 39% काम के साथ खत्म मानसून सत्र


लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार (13 अगस्त 2026) को अनिश्चिकाल के लिए स्थगित कर दी गई. मानसून सत्र में लोकसभा में 19 फीसदी तो राज्यसभा में 39 फीसदी कामकाज हुआ. इस बार एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल सके. अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा में लगातार गतिरोध बना रहा. इसे दूर करने के लिए विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के बीच आज तक सहमति नहीं बन पाई. 

मानसून सत्र के दौरान केवल 28 और 29 जुलाई के दौरान सदन में सामान्य माहौल देखने को मिला जब लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगभग दस घंटे तक चर्चा हुई. मानसून सत्र के आखिरी दिन सदन की कार्यवाही 11 बजे शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ने आसन पर बैठते ही सदस्यों से राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सम्मान में खड़े होने के लिए कहा. हालांकि सामान्यत: सत्र समाप्ति के मौके पर वंदे मातरम् से पहले वह अपने पारंपरिक संबोधन में उस सत्र की कार्य उत्पादकता, उसमें पारित विधेयकों, पूछे गए प्रश्नों आदि का उल्लेख करते हैं. 

वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन की रिकार्डिंग के बाद उन्होंने सदन की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई अन्य दलों के प्रमुख नेता और सदस्य सदन में मौजूद थे. हालांकि, कार्यवाही स्थगित होने के बाद अपने संवाददाता सम्मेलन में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि इस सत्र में लोकसभा की कार्य उत्पादकता 19 फीसदी रही. संसद का वर्तमान मानसून सत्र 20 जुलाई को आरंभ हुआ था. 

तारीख लोकसभा राज्यसभा
                                                                         पहला हफ्ता
20 जुलाई 2026 34 मिनट 40 मिनट
21 जुलाई 2026 17 मिनट 12 मिनट
22 जुलाई 2026 16 मिनट 24 मिनट
23 जुलाई 2026 14 मिनट 11 मिनट
24 जुलाई 2026 18 मिनट 17 मिनट
                                                                           दूसरा हफ्ता
27 जुलाई 2026 22 मिनट 18 मिनट
28 जुलाई 2026 9 घंटे 6 मिनट 9 मिनट
29 जुलाई 2026 2 घंटे 17 मिनट 1 घंटा 38 मिनट
30 जुलाई 2026 21 मिनट 9 घंटा 15 मिनट
31 जुलाई 2026 13 मिनट 21 मिनट
                                                                          तीसरा हफ्ता
3 अगस्त 2026 23 मिनट 1 घंटा, 45 मिनट
4 अगस्त 2026 20 मिनट 1 घंटा, 28 मिनट
5 अगस्त 2026 23 मिनट 3 घंटा, 30 मिनट
6 अगस्त 2026 17 मिनट 2 घंटा, 36 मिनट
7 अगस्त 2026 20 मिनट 35 मिनट
                                                                         चौथा हफ्ता
10 अगस्त 2026 33 मिनट 4 घंटा, 28 मिनट
11 अगस्त 2026 28 मिनट 2 घंटा, 46 मिनट
12 अगस्त 2026 47 मिनट 5 घंटा, 43 मिनट
13 अगस्त 2026 4 मिनट 1 घंटा, 5 मिनट
प्रोडक्टिविटी 17 घंटा 33 मिनट 37 घंटा 21 मिनट

लोकसभा अध्यक्ष पूरे सत्र में विपक्षी सदस्यों से बार-बार प्रश्नकाल चलने देने, विधेयकों पर चर्चा में भाग लेने और कार्यवाही में सहयोग करने की अपील करते रहे, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा. सत्र के आखिरी दिन तक यह गतिरोध नहीं टूट सका. सदन ने नीट पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में 29 जुलाई को परीक्षा में सुधार से संबंधित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी. सदन ने राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ ही उसी सम्मान के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य बनाने वाले ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को भी डीएमके समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी.  

मानसून सत्र में लोकसभा से पारित होने वाले विधेयकों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, केरल राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर ‘केरलम’ करने वाले केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक शामिल रहे. वहीं, लोकसभा ने बुधवार (12 अगस्त 2026) को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक (FCRA), 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) भेजने के प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित किया.

पूरे सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही केवल 37 घंटे 21 मिनट तक चली. सदन की उत्पादकता भी 39 फीसदी के आसपास रही. राज्यसभा के 271वें सत्र के समापन पर सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही का ब्यौरा पेश किया और लगातार हंगामे और व्यवधान पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि पूरे सत्र के दौरान बार-बार हुए व्यवधान के कारण सदन का कामकाज प्रभावित हुआ और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए उपलब्ध समय का भी नुकसान हुआ. हालांकि इन सबके बीच सदन ने कई विधेयकों पर विचार कर उन्हें पारित किया या वापस लौटाया.



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