संसद भवन परिसर में विरोध-प्रदर्शन के तौर-तरीकों को लेकर लोकसभा सचिवालय ने सख्त रुख अपना लिया है. सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर संसद के मकर द्वार के पास पुजारी का वेश धारण कर प्रदर्शन करने वाले पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के स्वांग के बाद सचिवालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संसद परिसर में इस तरह के वेशभूषा आधारित प्रदर्शन या नाटकीय विरोध की अनुमति नहीं दी जाएगी. बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई है और मौजूदा दिशानिर्देशों को अब सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है.
मकर द्वार पर प्रदर्शन को लेकर सचिवालय का कड़ा रुख
सूत्रों के अनुसार, संसद भवन परिसर के मकर द्वार पर किसी भी प्रकार के प्रदर्शन की अनुमति पहले से ही नहीं है. इसके बावजूद विपक्षी सांसदों ने यहां विरोध-प्रदर्शन किया और नाटक के जरिए अपनी बात रखने की कोशिश की. अब लोकसभा सचिवालय इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमों के सख्ती से पालन पर जोर दे रहा है. जानकारी के मुताबिक, भविष्य में संसद परिसर में इस तरह के प्रतीकात्मक प्रदर्शन, वेश बदलकर विरोध या मंचन जैसी गतिविधियों पर रोक को और प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा.
चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का प्रदर्शन
शुक्रवार को अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार के पास विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने एक नाटकीय प्रस्तुति भी दी. इस दौरान पप्पू यादव पुजारी के वेश में दानपेटी के पास बैठे थे, जबकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी श्रद्धालु की भूमिका में दानपेटी में पैसे डालने पहुंचे.
दानपेटी से पैसे जेब में डालने का किया अभिनय
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी जैसे ही दानपेटी में पैसे डालने पहुंचे, पप्पू यादव ने उन पैसों को निकालकर अपनी जेब में रख लिया. विपक्षी नेताओं ने इस अभिनय के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी इसी तरह हुई है.
इसके बाद कई विपक्षी सांसदों ने ‘चोर-चोर’ और ‘चढ़ावा चोर’ के नारे लगाए और पप्पू यादव के आसपास प्रदर्शन किया. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुआ.
अवधेश प्रसाद ने उठाई चर्चा की मांग
फैजाबाद (अयोध्या) से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि राम मंदिर के चढ़ावे का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुका है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को सबसे पहले अखिलेश यादव ने उठाया था और अब इसे आगे बढ़ाना विपक्ष की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि अयोध्या भगवान राम की पावन भूमि है और यदि वहां किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने इस मामले पर संसद में चर्चा कराने की भी मांग की.
छात्र आंदोलन का मुद्दा भी उठा
विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी संसद परिसर में उठाया. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की गई. उधर, राज्यसभा में भी इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस देने की बात कही, लेकिन सभापति ने स्पष्ट कर दिया कि इस नियम के तहत कोई भी नोटिस स्वीकार नहीं किया जाएगा.
