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सलमान खान की वो फिल्म जिसने हर भारतीय परिवार को हंसाया भी और रुलाया भी


90 के दशक का बॉलीवुड सिर्फ फिल्मों का दौर नहीं था, वो दौर था रिश्तों, प्यार और परिवार की भावनाओं का। उस समय लोग थिएटर सिर्फ एंटरटेनमेंट के लिए नहीं जाते थे, बल्कि अपने परिवार के साथ कुछ महसूस करने जाते थे,

और उन्हीं फिल्मों में एक नाम ऐसा आया, जिसने हर घर को अपना-सा लगा , ‘हम साथ-साथ हैं’। 1999 में रिलीज हुई ये फिल्म सिर्फ एक फैमिली ड्रामा नहीं थी, बल्कि भारतीय परिवारों की तस्वीर थी। 

बड़े भाई का सम्मान, छोटे भाई का प्यार, मां की ममता और रिश्तों की मिठास फिल्म का हर सीन लोगों के दिल को छू गया। उस दौर में एक्शन और रोमांस की कई फिल्में आईं, लेकिन ‘हम साथ-साथ हैं’ ने बिना बड़े ट्विस्ट और हिंसा के सिर्फ रिश्तों की ताकत पर इतिहास रच दिया। सूरज बड़जात्या ने इस फिल्म को इतने सादगी भरे अंदाज में बनाया कि दर्शकों को लगा जैसे वो किसी फिल्म को नहीं, बल्कि अपने ही घर की कहानी देख रहे हों। 

फिल्म में सलमान खान का ‘प्रेम’ वाला किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उनका शांत स्वभाव, परिवार के लिए प्यार और रिश्तों को निभाने का तरीका लोगों को बेहद पसंद आया, वहीं सैफ अली खान, मोहनीश बहल, तबू, सोनाली बेंद्रे, करिश्मा कपूर और नीलम जैसे कलाकारों ने कहानी को और भी खूबसूरत बना दिया। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि 19 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो सिनेमाघरों में परिवारों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई इस कहानी से जुड़ गया। यही वजह रही कि फिल्म ने भारत में करीब 40 करोड़ की कमाई की और दुनियाभर में 80 करोड़ से ज्यादा का कारोबार कर लिया, 

सबसे खास बात ये थी कि फिल्म ने सिर्फ पैसा नहीं कमाया, बल्कि लोगों का प्यार भी जीता। टीवी पर आज भी जब ‘हम साथ-साथ हैं’ आती है, तो लोग रुककर उसे जरूर देखते हैं। क्योंकि ये फिल्म हमें उस दौर की याद दिलाती है, जब रिश्ते फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत हुआ करते थे। ‘हम साथ-साथ हैं’ सिर्फ 1999 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म नहीं थी,ये उस दौर की भावनाओं का आईना थी, जिसने लोगों को सिखाया कि परिवार साथ हो, तो हर मुश्किल आसान लगती है



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