AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को शिक्षा से जुड़े सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए मोदी सरकार के ‘विकसित भारत’ विज़न पर सवाल उठाए, और कहा कि अल्पसंख्यक छात्रों को शिक्षा से वंचित किया जा रहा है. AIMIM प्रमुख ने 2021-22 के आंकड़ों का ज़िक्र किया, जिसके अनुसार प्राइमरी शिक्षा में मुस्लिम छात्रों का एनरोलमेंट 15 प्रतिशत था, जो अपर प्राइमरी में घटकर 14 प्रतिशत, सेकेंडरी में 12 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी में 10 प्रतिशत रह गया. उन्होंने कहा कि प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक मुस्लिम छात्रों की संख्या में यह 5 प्रतिशत की गिरावट समुदाय के शिक्षा से दूर होने का संकेत है और सवाल किया कि क्या इससे देश का भला होता है.
घट रही मुस्लिम छात्रों की संख्या
हायर एजुकेशन पर ऑल इंडिया सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि 2016-17 में मुस्लिम छात्रों का एनरोलमेंट 4.7 प्रतिशत था, जो 2019-20 में बढ़कर 5.4 प्रतिशत हो गया, लेकिन 2021 में यह घटकर 4.64 प्रतिशत रह गया. इस गिरावट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सरकार पर ‘पक्षपात’ और ‘नफ़रत की राजनीति’ का आरोप लगाया, क्योंकि पिछले पांच वर्षों से अल्पसंख्यकों के लिए स्कॉलरशिप फंड रोक दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप का वितरण नहीं किया गया है और मौलाना आज़ाद फ़ाउंडेशन को बंद कर दिया गया है.
अल्पसंख्यक मंत्रालय बेअसर
ओवैसी ने कहा कि 2014 से अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय बेअसर हो गया है और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के लिए PMJVK योजना के तहत फंड जारी नहीं किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2014 में सरकार को सौंपी गई कुंडू कमेटी की रिपोर्ट किसी दफ़्तर में पड़ी हुई है और कहा कि मुस्लिम छात्रों के बीच पढ़ाई छोड़ने की उच्च दर का मुख्य कारण गरीबी है. उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि वह अल्पसंख्यक छात्रों के लिए स्कॉलरशिप फंड क्यों जारी नहीं कर रही है, जबकि दूसरों को वे मिल रहे हैं.
विकसित भारत में मुस्लिम कहां?
AIMIM प्रमुख ने कहा कि अगर सरकार 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना चाहती है, तो वह मुस्लिम युवाओं को पीछे नहीं छोड़ सकती. उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक समुदायों में मुस्लिम युवाओं की आबादी सबसे ज़्यादा है और उन्हें शिक्षा से वंचित रखना देश के भविष्य पर सीधा हमला है. उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि पिछले पाँच सालों से माइनॉरिटी स्कॉलरशिप क्यों बंद हैं और मांग की कि सरकार बकाया फंड जारी करे और मौलाना आज़ाद फ़ाउंडेशन को फिर से बहाल करे. उन्होंने कहा कि समुदाय के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बनना चाहते हैं और सरकार को उनकी उम्मीदों का समर्थन करना चाहिए, न कि उनके रास्ते में रुकावट डालनी चाहिए.
