- विदेश मंत्रालय ने सिंधु जल संधि पर भारत का रुख स्पष्ट किया।
- भारत ने अफगानिस्तान संग संबंध मजबूत करने की उम्मीद जताई है।
- जयसवाल ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया है।
पाकिस्तान में भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही दोनों देशों के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर लगातार तकरार की स्थिति बनी हुई है. इस बीच भारत ने एक बार फिर से इसे लेकर अपने पक्ष को दोहराया है और कहा है कि हमारे पक्ष में कोई बदलाव नहीं आया है.
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (14 अगस्त, 2026) को प्रेस ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए सिंधु जल समझौते पर भारत सरकार के पक्ष को स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘सिंधु जल संधि पर हमारा रुख सर्वविदित है. इसमें कोई बदलाव नहीं आया है.’
#WATCH | Delhi | On the status of the Indus Water Treaty, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, “Our position on the Indus Treaty is well known. There’s no change in it.” pic.twitter.com/TE1tsyslVk
— ANI (@ANI) August 14, 2026
अफगानिस्तान के साथ संबंध पर भारत का पक्ष
इसके साथ ही, उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के बीच रिश्तों को लेकर भी स्थिति को स्पष्ट किया है. रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘पिछले कुछ महीनों और अब एक साल से भी ज्यादा समय में अफगानिस्तान के साथ हमारी कई स्तरों पर बातचीत और मुलाकातें हुई हैं. इस दौरान अफगानिस्तान के कई मंत्रियों का दौरा भी हुआ है, कई प्रतिनिधिमंडल अब तक भारत आए हैं और इन दौरों से विकास, सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रों में हमारी साझेदारी मजबूत हुई है.’
उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान के साथ हमारे लंबे समय से संबंध रहे हैं और हम उनके साथ अपने इन संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद करते हैं.’
नॉर्वे के मंत्री की टिप्पणी पर भारत का रिएक्शन
वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बर्थ ईडे की टिप्पणी पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, ‘पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय समुदायों को जिन मुद्दों पर चिंता करनी चाहिए, उसमें अवैध रूप से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में वर्तमान में किए जा रहे अत्याचार और सीमा पार आतंकवाद के लिए PoK का हो रहा इस्तेमाल मुख्य मुद्दा है.’
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