- इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की तैयारी, पर तनाव बरकरार है।
- पाकिस्तान ने दोनों देशों के स्वागत में सुरक्षा कड़ी की।
- अमेरिका-ईरान एक-दूसरे को धमकी दे रहे, बातचीत कठिन।
- ईरान ने कहा, धमकी से नहीं, बल्कि समझौते से हल होगा।
Islamabad Peace Talks: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता होनी है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच लगातार तनाव की स्थिति को लेकर अभी कुछ भी कहना संभव नहीं लग रहा है. इस बीच अगर कोई सबसे ज्यादा परेशान है, तो वो है पाकिस्तान. पाकिस्तान की हालत इस वक्त मझधार में फंसी है, ऐसा इसलिए क्योंकि इस्लामाबाद शनिवार (18 अप्रैल, 2026) से ही अमेरिका और ईरान के डेलीगेशन की स्वागत की तैयारी में जुटा है और ईरान अमेरिका के बर्ताव को लेकर बातचीत के लिए आने से इनकार रहा है.
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मंगलवार (21 अप्रैल, 2026) को पुष्टि करते हुए कहा कि तेहरान का इस वक्त इस्लामाबाद जाने का कोई प्लान नहीं है. इसके पीछे का कारण अमेरिकी पक्ष के विरोधाभासी मैसेज, विरोधाभासी बर्ताव और वैसी कार्रवाइयां है, जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता.
पाकिस्तान सरकार ने दोनों देशों के डेलीगेशन की मुलाकात और बातचीत के लिए इस्लामाबाद की फाइव स्टार लग्जरी होटल सेरेना और मैरियट होटल को कब्जे में लिया गया है, वहां एक दिन का किराया 53 हजार पाकिस्तानी रुपये है और 387 कमरे वाले होटल के लिए पाकिस्तान एक दिन में 2 करोड़ से ज्यादा पाकिस्तानी रुपये खर्च कर रहा है. इसे ऐसे समझ लीजिए कि इस्लामाबाद के सेरेना होटल में मंडप तैयार है, लेकिन अब तक ये तय नहीं है कि बारात आएगी या फिर नहीं.
US और ईरान के स्वागत में खुले बांह लेकर खड़ा है पाकिस्तान
अमेरिकी और ईरानी डेलीगेशन के स्वागत के लिए पाकिस्तान खुले बांह लेकर खड़ा है. पूरा शहर छावनी बन चुका है. रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद में स्कूल, कॉलेज सभी शनिवार से ही बंद हैं. इस्लामाबाद के एक बड़े हिस्से को रेड जोन बना दिया गया है. रेड जोन में पाकिस्तानी सेना के रेंजर्स तैनात हैं. करीब 10 हजार जवान सुरक्षा में लगाए गए हैं. रावलपिंडी से इस्लामाबाद जाने वाला हाइवे बंद है. पुलिस फ्लैग मार्च कर रही है. अमेरिकी वायुसेना के बड़े-बड़े विमान रावलपिंडी के नूरखान एयरबेस पर उतर चुके हैं और पाकिस्तान लगातार दावा कर रहा है कि बुधवार (22 अप्रैल, 2026) को अमेरिका और ईरान दोनों के वार्ताकार इस्लामाबाद पहुंचेंगे, लेकिन जिन्हें हाथ मिलाने के लिए आना है, वो तो धमकी-धमकी खेल रहे हैं.
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एक-दूसरे को धमकी देने में व्यस्त है अमेरिका और ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ चेतावनी नहीं दे रहे हैं, बल्कि बातचीत से ठीक पहले ट्रंप की नेवी ने ओमान की खाड़ी से गुजर रहे ईरान के एक जहाज पर हमला करके उसे अपने कब्जे में ले लिया. वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका जिस तरीके का व्यवहार कर रहा है, उसके बाद हम और ज्यादा सावधान हो गए हैं. कुल मिलाकर अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत एक बड़े कूटनीतिक टकराव की तरफ बढ़ चुकी है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की दबाव की कूटनीति कर रहे हैं जबकि ईरान लॉन्ग गेम की रणनीति पर चल रहा है. ट्रंप फौरन सरेंडर और बड़े नतीजे मांग रहे हैं जबकि ईरानी नेतृत्व समय लेने वाली प्रक्रिया में भरोसा रखता है.
ईरान का मानना है कि अमेरिका के साथ समझौता करना व्यर्थ है, क्योंकि ट्रंप ना सिर्फ पिछले वादों से मुकर रहे हैं, बल्कि होर्मुज में नाकेबंदी और हमले करके सीजफायर का उल्लंघन भी कर रहे हैं. ईरान ने संदेश देने की कोशिश की है कि होर्मुज सिर्फ ईरान का है. होर्मुज के आसमान में ईरान का झंडा लहराकर दुनिया को बताया गया है कि ईरान इस पर कभी कोई समझौता नहीं करेगा.
ईरान ने अमेरिका के साथ समझौते पर रुख किया साफ
ईरान ने स्टैंड साफ कर दिया है कि ट्रंप कितनी भी धमकी दे लें ईरान डरने वाला नहीं है. जबकि ट्रंप ने सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को एक रेडियो प्रोग्राम में फोन कॉल पर बात करते हुए दावा किया कि ईरान या तो समझौता करेगा या फिर ऐसी मुश्किलों का सामना करेगा, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी. जबकि पाकिस्तान में मौजूद ईरानी राजदूत ने कहा, ‘ये एक स्वीकार किया गया सत्य है कि एक विशाल सभ्यता वाला कोई भी देश धमकी और ताकत के दबाव में बातचीत नहीं करता है. ये एक महत्वपूर्ण इस्लामिक और धार्मिक सिद्धांत है. काश कि अमेरिका इसे समझ पाता.’
दोनों तरफ खटास है. भरोसे की कमी है और नतीजा ये कि पकवान तैयार हो रहे हैं. रेड कारपेट बिछाया जा रहा है. एयरपोर्ट से लेकर होटल तक के रास्ते में मुनीर और शहबाज मिलकर सजावट करवा रहे हैं, लेकिन मेहमान पहुंचेंगे या फिर नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है. युद्ध शुरू हुए पूरे 53 दिन बीत चुके हैं, लेकिन दुनिया को अब भी ये जंग किसी नतीजे पर पहुंचते हुए दिखाई नहीं दे रही है.
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