भारतीय वायु सेना आज यानी 8 अक्टूबर को अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है. 8 अक्टूबर 1932 को स्थापित हुई वायु सेना आज देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है. युद्ध के समय देश के आसमान की सुरक्षा से लेकर आपदा और राहत बचाव अभियानों तक वायु सेना की जिम्मेदारियां काफी व्यापक रही हैं. एयरफोर्स डे के मौके पर वायु योद्धाओं के साहस समर्पण और सेवा को याद किया जाता है. भारतीय वायुसेना सिर्फ लड़ाकू विमान और पायलटों तक सीमित नहीं है, इसमें फ्लाइंग ब्रांच के अलावा टेक्निकल और ग्राउंड ड्यूटी की कई शाखाओं में करियर के अवसर मिलते हैं. 12वीं के बाद से लेकर ग्रेजुएशन तक कई युवाओं के लिए वायुसेना में शामिल होने के अलग-अलग रास्ते खुलते हैं. ऐसे में चलिए अगर आप भी इस में करियर बनाना चाहते हैं, तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप वायुसेना में कैसे करियर बना सकते हैं.
भारतीय वायुसेना में करियर बनाने के लिए 12वीं के बाद से ही रास्ते खुल जाते हैं. उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अलग-अलग एंट्री के जरिए वायुसेना में शामिल हो सकते हैं. आईएएफ में मुख्य रूप से फ्लाइंग ब्रांच, ग्राउंड ड्यूटी टेक्निकल और ग्राउंड ड्यूटी नॉन टेक्निकल क्षेत्रों में करियर के अवसर मिलते हैं. फ्लाइंग ब्रांच में फाइटर, ट्रांसपोर्ट और हेलिकॉप्टर पायलट शामिल होते हैं, जबकि टेक्निकल ब्रांच में एयरक्राफ्ट और तकनीकी सिस्टम से जुड़े काम होते हैं.
12वीं के बाद एनडीए से बने अधिकारी
12वीं के बाद वायु सेना में अधिकारी बनने का प्रमुख रास्ता एनडीए है. इसकी परीक्षा यूपीएससी की ओर से आयोजित होती है. वायु सेना के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स सब्जेक्ट का होना जरूरी है. वहीं उम्मीदवार की उम्र आमतौर पर 16 से 19 साल के बीच होनी चाहिए. चयन के लिए लिखित परीक्षा, एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल परीक्षा होती है. फ्लाइंग ब्रांच के उम्मीदवारों को सीपीएसएस परीक्षा से भी गुजरना होता है.
अग्निवीर वायु के जरिए भी एंट्री
12वीं के बाद अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर वायु के रूप में भी भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ जा सकता है. साइंस स्ट्रीम के उम्मीदवारों के लिए मैथ्स, फिजिक्स और इंग्लिश के साथ 12वीं पास होना जरूरी है. जबकि नॉन-साइंस उम्मीदवार किसी भी स्ट्रीम से 12वीं कर सकते हैं. इसमें चयन प्रक्रिया ऑनलाइन परीक्षा, फिजिकल फिटनेस टेस्ट, एडेप्टेबिलिटी टेस्ट और मेडिकल परीक्षा होती है. अग्निवीर वायु के तौर पर सेवा की अवधि 4 साल होती है.
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ग्रेजुएशन के बाद भी मौके
ग्रेजुएशन के बाद भी वायु सेना में अधिकारी बनने के कई ऑप्शन है. उम्मीदवार एएफसीएटी, सीडीएस और एनसीसी स्पेशल एंट्री के जरिए आवेदन कर सकते हैं. एएफसीएटी के जरिए फ्लाइंग ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी की अलग-अलग शाखाओं में मौके मिलते हैं. फ्लाइंग ब्रांच के लिए आमतौर पर 20 से 24 साल की आयु और 12वीं में मैथ्स में फिजिक्स की पढ़ाई जरूरी होती है. एनसीसी स्पेशल एंट्री के लिए एयरविंग का एनसीसी सी सर्टिफिकेट होना जरूरी है.
कितनी मिलती है वायु सेना में सैलरी?
वायुसेना में सैलरी पद और एंट्री के अनुसार अलग-अलग होती है. एनडीए के जरिए अधिकारी बनने के बाद फ्लाइंग ऑफिसर का पद मिलता है. अधिकारी के लिए 7 सीपीसी पे मैट्रिक्स के लेवल 10 में बेसिक पे 56,100 रुपये प्रतिमाह है. इसके अलावा मिलिट्री सर्विस पे 15,500 रुपये हैं, यानी भत्तों को छोड़कर कुल रकम 71,600 प्रतिमाह होती है. वहीं अग्निवीर वायु के लिए पहले साल का मासिक पैकेज 30,000 रुपये, दूसरे साल 3,3000 रुपये, तीसरे साल 36 हजार रुपये और 4 साल 40,000 रुपये है. इसमें तय हिस्से की राशि और अग्निवीर कॉपर्स फंड में भी जाती है.
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