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बिहार: कोचिंग शिक्षक से मंत्री तक का सफर, अपने दम पर बनाई पहचान, कौन हैं मिथिलेश तिवारी?


गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर विधानसभा से भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी को सम्राट चौधरी की सरकार में जगह मिली है. बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने करियर की शुरुआत पटना में शिक्षक के रूप में की. सिधवलिया प्रखंड के डुमरिया निवासी देवनारायण तिवारी के पुत्र मिथिलेश तिवारी है. बैकुंठपुर के भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी के पिता देवनारायण तिवारी पटना में पीडब्लूडी विभाग में कर्मी थे. मिथिलेश तिवारी ने पटना में रहकर अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स किया और अपने शुरुआती जीवन में कुछ समय के लिए पटना में कोचिंग भी चलाते रहे. 

1988 में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और 1990 में बीजेपी से सक्रिय राजनीति में आए. ने 1988 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़कर राजनीति में कदम रखा. 1990 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने लगातार पार्टी में कई जिम्मेदारियों को निभाया है. 

मिथिलेश तिवारी ने निभाई कई जिम्मेदारियां

1996 में भाजपा क्रीड़ा मंच के प्रदेश मंत्री, 1998 में प्रदेश उपाध्यक्ष, और 2000 में भाजपा क्रीड़ा मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष बने. इसके बाद उन्होंने पार्टी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया, जैसे कि प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य, और बिहार, बंगाल, उड़ीसा तथा झारखंड के प्रभारी भी बने. आरजेडी के शासन में पहली बार भाजपा ने मिथिलेश तिवारी को कटेया से 2005 में उम्मीदवार बनाया. बसपा के उम्मीदवार रहे अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय से उनका मुकाबला रहा. चुनाव हारना पड़ा. 

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2025 चुनाव में RJD प्रत्याशी को हराकर लहराया परचम

उसके बाद 2015 में जदयू और भाजपा जब अलग चुनाव मैदान में आये तो भाजपा ने भरोसा जताते हुए बैकुंठपुर से मिथिलेश तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा. तब जदयू और राजद को पीछे छोड़कर चुनाव जीते. 2020 के चुनाव में एनडीए ने बैकुंठपुर से चुनाव मैदान में उतारा. तब एनडीए से बगावत कर मंजीत सिंह निर्दलीय चुनाव लड़े. तब मिथिलेश तिवारी को हरा कर यहां से राजद ने बाजी मारी. प्रेम शंकर यादव विधायक बने. वर्ष 2025 में हुए चुनाव में मिथिलेश तिवारी ने राजद को हरा कर परचम लहराया. मिथिलेश तिवारी के जीतने के बाद से ही तय था कि मंत्री बनेंगे. लेकिन तब नीतीश कुमार के कैबिनेट में मिथिलेश तिवारी को जगह नहीं मिली.

अपने दम पर बनाई पहचान, नहीं है कोई राजनीतिक बैकग्राउंड

बिहार सरकार में पहली बार मंत्री बने मिथिलेश तिवारी ने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है. उनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं रहा है. अपनी व्यवहार कुशलता, वाकपटुता और प्रखर वक्ता की छवि के कारण उन्होंने पार्टी में अपनी पकड़ बनाई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास जीत लिया. समय के साथ पार्टी में उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए उन्हें जाना और पहचाना जाने लगा, जिसका परिणाम आज मंत्री पद के रूप में सामने आया.

सनातन धर्म, महोत्सव और क्षेत्र विकास के लिए भी समर्पित

मिथिलेश तिवारी न सिर्फ क्षेत्र के बहुमुखी विकास के लिए समर्पित रहे हैं, बल्कि सनातन धर्म के उत्थान के प्रति भी जागरूक रहे हैं. अपने कार्यकाल में उन्होंने थावे महोत्सव, नारायणी महोत्सव, सिंहासनी महोत्सव को ना सिर्फ सरकार से अनुमति लिया बल्कि भव्य तरीके से आयोजित कराया, वहीं थावे महोत्सव की शुरुआत कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके अलावा वे प्रतिवर्ष विंध्याचल माता के दर्शन और काशी विश्वनाथ बाबा के दर्शन के लिए भी जाते रहे हैं.

मिथलेश तिवारी के मंत्री बनते ही समर्थकों में खुशी की लहर

बैकुंठपुर के विधायक मिथिलेश तिवारी के मंत्री बनते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई. कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाकर मिठाइयां खिलाकर एक दूसरे को बधाई दी. जमकर पटाखे फोड़े गए. प्रखंड के शेर निवासी भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राहुल आनंद ने कहा कि मिथलेश तिवारी को मंत्री बनाए जाने से बैकुंठपुर सहित पूरे बिहार का चौमुखी विकास होगा. भाजपा कार्यकर्ता पवन गुप्ता, मोहन साह, प्रदीप पांडेय, दिनेश पांडेय, संजय सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया

41 वर्षों बाद बैकुंठपुर विधानसभा को मंत्री पद

बैकुंठपुर विधानसभा को 41 वर्षों बाद मंत्री पद मिला है. इससे पहले यहां से विधायक रहे ब्रजकिशोर नारायण सिंह उर्फ बाबू साहेब 1982 से 1985 तक बिहार सरकार में मंत्री रहे थे. तब बाबू साहब से उनको जाना जाता था. उनके ही पुत्र मंजीत सिंह बरौली से विधायक हैं. बैकुंठपुर में आज भी लोग बाबू साहब का नाम सम्मान से लेते हैं.

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