Astrology Tips: क्या आप भी किसी रत्न को धारण करते हैं और उसे बार-बार उतार कर रख देते हैं या फिर सोने से पहले उतर कर रख देते हैं कि सुबह उठकर पहन लेंगे तो जान ले यह कड़े नियम जो रत्न को धारण करने से पहले आपको समझ लेने चाहिए. अक्सर देखा गया है कि लोग रत्न धारण करने के बाद रात को सोते समय उसे उतार कर रख देते हैं. क्या ऐसा करना सही है? ज्योतिष शास्त्र और रतन शास्त्र के अनुसार, रत्न धारण करने के कुछ कड़े नियम है जिनका पालन न करने पर फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है.
हम रत्न इसलिए धारण करते हैं कि यह उसे विशेष ग्रह को ठीक करेगा जो हमारी कुंडली में कमजोर है. उसे ग्रह की शक्ति को सोकर हमारे शरीर में संचारित करेगा हर एक रत्न हर एक राशि और ग्रह के लिए बनाया गया है. उसके संबंधित दिन में ही उसे रत्न को पहनना चाहिए हम उसे एक शुभ मुहूर्त निकाल कर ही पहनते हैं तो बार-बार उतारना और उसको 4–5 घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ देना बिल्कुल सही नहीं है.
दिन के समय हम काफी एक्टिव रहते हैं, इसलिए रत्न की शक्ति हमारे काम आती है. लेकिन रात को सोते समय हमारा अनकॉन्शियस माइंड एक्टिव रहता है.
- नीलम और गोमेद जैसे रत्न जिनकी तेज शक्ति होने के कारण हमने पहन कर अगर सोते हैं तो हम दिमाग में भारीपन महसूस कर सकते हैं और रात को डरावने सपने आने की समस्या भी हो सकती है.
- पुखराज और माणिक्य रत्न इन्हें आमतौर पर पहना जा सकता है. लेकिन, त्वचा अगर संवेदनशील है तो रक्त संचार को सुचारू रूप से रखने के लिए इन्हें उतरकर कर के पास या फिर मंदिर में रखना ही ठीक होता है.
रत्न धारण करने के कुछ कड़े नियम:–
अगर आप रन का पूरा लाभ चाहते हैं तो इन कुछ बातों का ध्यान रखें
शुद्धता : रत्न पहनने से पहले उसे कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करना आवश्यक है. अगर आप काफी दिन से रत्न को उतार कर रखे हुए हैं तो उसे पहले गंगाजल से शुद्ध कर ले और उसके संबंधित दिन में ही उसे दोबारा पहने.
खंडित रत्न: अगर आपकी अंगूठी कहीं से चटक गई है या फिर रत्न घिस गया है तो उसे तुरंत उतार दे खंडित रत्न लाभ की वजह नेगेटिव एनर्जी दे सकता है और इसके विपरीत फल प्रदान कर सकता है.
धातु का चुनाव: हर धातु के साथ हर रत्न संतुलित नहीं बैठता है . जैसे माणिक्य यानी कि रूबी और पुखराज यानी कि सफायर के लिए सोना या तांबा ही अच्छा होता है, जबकि नीलम यानी की ब्लू सफायर के लिए चांदी या फिर पंच धातु की सलाह दी जाती है. गलत धातु रत्न के प्रभाव और शक्तियों को शून्य कर देता है वह एकदम पत्थर समान माना जाता है.
ग्रहों का ध्यान : अगर आपने एक से ज्यादा अंगूठी पहनी है तो ध्यान रखें कि जो अंगूठी आपने पहनी उसके शत्रु ग्रह के साथ दूसरी अंगूठी ना पहने जैसे हर रत्न का एक ग्रह होता है वैसे ही हर रत्न के शत्रु ग्रह भी होते हैं जैसे शुक्र के रत्न हीरे के साथ सूर्य का रत्न माणिक्य पहनना जीवन में मतभेद और संघर्ष पैदा करता है.
शुभ मुहूर्त: हर रत्न का एक विशेष दिन और तिथि होती है उसे उसे दिन के ही शुभ मुहूर्त मैं ही पहनना चाहिए. जैसे पुखराज का गुरुवार और मोती को सोमवार की सुबह ही पहनना चाहिए यह अत्यंत फलदाई होता है.
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