आज के समय में जब प्रधानमंत्री की सैलरी लाखों रुपये में है, तब यह जानना दिलचस्प है कि आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को कितनी तनख्वाह मिलती थी. आइए डिटेल्स जानते हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार आज प्रधानमंत्री को हर महीने करीब 2.80 लाख रुपये वेतन मिलता है. लेकिन साल 1950 के आसपास हालात बिल्कुल अलग थे. उस समय देश नया-नया आजाद हुआ था तब सैलरी बेहद कम हुआ करती थी. आजादी के बाद मंत्रियों और सांसदों के वेतन को तय करने के लिए एक कानून बनाया गया. इसी के तहत प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों का वेतन 3000 रुपये प्रति माह तय किया गया. इसके साथ 500 रुपये का एक भत्ता भी मिलता था, जो अतिरिक्त खर्चों के लिए था.
पहले उनका वेतन 3000 रुपये तय हुआ. लेकिन नेहरू ने इसे घटाकर 2250 रुपये कर दिया. कुछ समय बाद उन्होंने इसे और कम करवा कर केवल 2000 रुपये प्रति माह कर लिया.500 रुपये का जो भत्ता तय था, उसका उपयोग भी बहुत सोच-समझकर किया जाता था. यह राशि निजी आराम के लिए नहीं, बल्कि आधिकारिक जरूरतों के लिए थी. उस समय सरकारी खर्च को लेकर बहुत सख्ती थी.
आज से तुलना
अगर आज की सैलरी से तुलना करें, तो फर्क बहुत बड़ा दिखता है. आज प्रधानमंत्री का वेतन करीब 2.80 लाख रुपये प्रति माह है. समय के साथ महंगाई बढ़ी, जिम्मेदारियां बढ़ीं और उसी के अनुसार वेतन में भी बढ़ोतरी हुई. आज के समय में प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षित स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) की टीम तैनात रहती है, जो हर समय उनके साथ रहती है. आधिकारिक दौरों के लिए प्रधानमंत्री के पास विशेष विमान एयर इंडिया वन उपलब्ध रहता है. साथ ही प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास लोक कल्याण मार्ग पर स्थित है. इसके अलावा भी कई साड़ी सुविधाएं पीएम को मिलती हैं.
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पीएम की क्या होती हैं जिम्मेदारियां?
भारत का प्रधानमंत्री देश की सरकार का सबसे प्रमुख चेहरा होता है. यह पद केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे शासन तंत्र को दिशा देने का केंद्र है. प्रधानमंत्री कई अहम भूमिकाएं निभाते हैं, जो देश की नीतियों, सुरक्षा, संसद और विदेश संबंधों तक फैली होती हैं. प्रधानमंत्री कैबिनेट के प्रमुख होते हैं. कैबिनेट में अलग-अलग मंत्रालयों के मंत्री शामिल होते हैं. देश से जुड़े बड़े फैसले, नीतियां और योजनाएं इसी समूह में तय होती हैं, और इसकी अगुवाई प्रधानमंत्री करते हैं.
प्रधानमंत्री लोकसभा के नेता होते हैं. सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चले, चर्चा सही ढंग से हो और जरूरी काम समय पर पूरे हों इसकी जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री पर होती है. देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सलाह देने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं. सुरक्षा, रक्षा और आतंरिक शांति से जुड़े निर्णयों में उनकी अहम भूमिका होती है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं. अन्य देशों के साथ संबंध बनाना, उन्हें मजबूत करना और वैश्विक बैठकों में भारत की बात रखना उनकी जिम्मेदारी है.
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