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सपा के PDA फॉर्मूले की काट बनेगा योगी कैबिनेट विस्तार? दलित-पिछड़ा समीकरण साधने उतरी BJP


उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज रविवार (10 मई) को बड़ा दिन है, सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है. राजभवन में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. दोपहर 3 बजे नए मंत्री राजभवन पहुंचेंगे और 3:30 बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा. सरकार के सभी मंत्रियों को बुलाया गया है. इस विस्तार में कुल 6 नए चेहरे शामिल किए जा रहे हैं. इनमें कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा, भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय और कृष्णा पासवान शपथ लेंगी.

इस पूरे कैबिनेट विस्तार को बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति से जोड़कर देख रही है. खास बात यह है कि इस बार जातीय और सामाजिक समीकरणों पर सबसे ज्यादा फोकस किया गया है.

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माना जा रहा है कि बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक फार्मूले की काट निकालने के लिए यह पूरा प्लान तैयार किया है.

पिछड़ों और दलितों पर बीजेपी का बड़ा दांव

योगी सरकार के इस विस्तार में सबसे ज्यादा ध्यान पिछड़े और दलित वर्ग पर दिया गया है. बीजेपी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि सरकार में हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है.

नए मंत्रियों में भूपेंद्र चौधरी, पूजा पाल और हंसराज विश्वकर्मा पिछड़े वर्ग से आते हैं. वहीं सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान दलित समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे. बीजेपी का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में पिछड़े और दलित वोटों का एक हिस्सा सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर गया था. अब पार्टी उसी वोट बैंक को फिर से अपने साथ जोड़ने की कोशिश में जुटी है.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी PDA के जवाब में सबका साथ-सबका विकास के अपने पुराने नारे को नए तरीके से मैदान में उतार रही है. पार्टी यह दिखाना चाहती है कि सिर्फ चुनावी नारे नहीं, बल्कि सत्ता में भी सभी वर्गों को हिस्सेदारी दी जा रही है.

दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश

बीजेपी ने इस बार दलित समाज के भीतर भी अलग-अलग जातीय समीकरणों पर काम किया है. सुरेंद्र दिलेर वाल्मीकि समाज से आते हैं जबकि कृष्णा पासवान पासी समाज का चेहरा मानी जाती हैं.

वाल्मीकि समाज लंबे समय से बीजेपी के साथ माना जाता है, लेकिन सरकार में उनका सीधा प्रतिनिधित्व नहीं था. ऐसे में सुरेंद्र दिलेर को मंत्री बनाकर बीजेपी उस वर्ग को बड़ा संदेश देना चाहती है.

वहीं पासी समाज को लेकर भी बीजेपी सतर्क दिख रही है. 2024 लोकसभा चुनाव में माना गया कि पासी वोटों का एक हिस्सा बीजेपी से दूर गया था. अब कृष्णा पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल कर पार्टी उस नाराजगी को कम करने की कोशिश कर रही है.

वाराणसी को खास महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भी इस कैबिनेट विस्तार में खास अहमियत दी गई है. बीजेपी जिलाध्यक्ष हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाकर पार्टी ने पूर्वांचल और खासकर कारीगर वर्ग को साधने का प्रयास किया है.

हंसराज विश्वकर्मा के मंत्री बनने के बाद वाराणसी से मंत्रियों की संख्या और बढ़ जाएगी. पहले से अनिल राजभर, रवींद्र जायसवाल और दयाशंकर मिश्र दयालु सरकार में शामिल हैं. अब हंसराज विश्वकर्मा भी टीम योगी का हिस्सा होंगे.

बीजेपी का मानना है कि विश्वकर्मा समाज में अच्छी पकड़ बनाकर वह पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत कर सकती है. सरकार पहले से विश्वकर्मा सम्मान योजना चला रही है और अब उसी वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी दिया जा रहा है.

मनोज पांडेय के जरिए कांग्रेस पर निशाना

कैबिनेट विस्तार में सबसे चर्चित नामों में से एक मनोज पांडेय का भी है. वह पहले समाजवादी पार्टी में थे और अखिलेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. रायबरेली जैसे कांग्रेस के मजबूत गढ़ से आने वाले मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर बीजेपी बड़ा राजनीतिक संदेश देना चाहती है.

रायबरेली को कांग्रेस का पारंपरिक किला माना जाता है. ऐसे में बीजेपी वहां अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रही है. मनोज पांडेय को आगे कर पार्टी ब्राह्मण और सवर्ण वोटरों के साथ-साथ कांग्रेस समर्थक वर्ग में भी सेंध लगाने की तैयारी में है.

महिलाओं को भी साधने की रणनीति

बीजेपी इस विस्तार के जरिए महिला वोट बैंक को भी मजबूत करना चाहती है. पूजा पाल और कृष्णा पासवान को मंत्री बनाकर पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि महिलाओं को सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि सरकार में भी उनकी भागीदारी बढ़ाई जा रही है.

2027 चुनाव से पहले बीजेपी महिलाओं के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है. यही वजह है कि आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया गया है.

संगठन और आयोगों में भी होंगे बदलाव

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट विस्तार के बाद बीजेपी संगठन और आयोग-निगमों में भी बड़े बदलाव कर सकती है. प्रदेश संगठन में नए चेहरों को जगह देने के साथ जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की तैयारी है.

बीजेपी की कोशिश है कि हर वर्ग और हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देकर विपक्ष को बड़ा मुद्दा न मिले. यही वजह है कि आने वाले दिनों में संगठन और बोर्ड-निगमों में भी कई नियुक्तियां हो सकती हैं.

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देखा जाए तो योगी सरकार का यह कैबिनेट विस्तार सिर्फ मंत्री बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए बीजेपी 2027 के चुनावी रण की जमीन तैयार कर रही है. PDA की राजनीति के मुकाबले बीजेपी अब सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व के नए फॉर्मूले के साथ मैदान में उतरती दिखाई दे रही है.



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