दिल्ली विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी हॉस्टल फॉर वीमेन (UHW) में गुरुवार (21 मई) देर रात छात्राओं का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया. बड़ी संख्या में छात्राएं रात करीब 9:30 बजे से हॉस्टल परिसर के बाहर धरने पर बैठी हैं. छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल प्रशासन उन पर जबरन हॉस्टल खाली करने का दबाव बना रहा है.
प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पानी की सप्लाई बंद करने, रीडिंग रूम की कुर्सियां हटाने और अतिरिक्त शुल्क लगाने जैसे कदम उठाए हैं, जिससे पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी प्रभावित हो रही है.
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छात्राओं के मुताबिक इस समय कई छात्राएं सेमेस्टर परीक्षा और NET की तैयारी कर रही हैं. ऐसे समय में प्रशासन ने हॉस्टल के दो ब्लॉकों में पानी की सप्लाई रोक दी. उनका कहना है कि भीषण गर्मी में पानी बंद होने से हालात और मुश्किल हो गए हैं.
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि रीडिंग रूम से कुर्सियां हटाने की वजह से पढ़ाई करने में दिक्कत आ रही है. उनका कहना है कि मई महीने में अचानक हॉस्टल खाली कराने का फैसला गलत है, क्योंकि जून और जुलाई तक की फीस पहले ही जमा कराई जा चुकी है.
अतिरिक्त शुल्क को लेकर बढ़ा विवाद
प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं का कहना है कि 16 मई को भी उन्होंने इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया था. उस दौरान हॉस्टल प्रोवोस्ट ने सुविधाएं बहाल करने और रहने की समयसीमा बढ़ाने का मौखिक आश्वासन दिया था.
लेकिन छात्राओं का आरोप है कि बाद में प्रशासन ने नया आदेश जारी कर हॉस्टल में रुकने वाली छात्राओं पर 450 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया. इसे लेकर छात्राओं में नाराजगी और बढ़ गई है.
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AISA ने भी किया समर्थन
छात्र संगठन AISA ने भी छात्राओं के आंदोलन का समर्थन किया है. संगठन ने UHW प्रोवोस्ट के इस्तीफे की मांग की है. साथ ही 24 घंटे पानी की सप्लाई बहाल करने और बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के छात्राओं को हॉस्टल में रहने की अनुमति देने की मांग उठाई है. फिलहाल छात्राएं अपनी मांगों को लेकर डटी हुई हैं. देर रात तक हॉस्टल परिसर के बाहर प्रदर्शन जारी रहा.
