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पिता की मौत के बाद टूटी युवती, दिव्यांग युवक की समझ और भरोसे ने बढ़ाई रिश्ते की डोर, शादी के बंधन में बधेंगे


जीवन की कठिनाइयों ने जहां कई लोगों को तोड़ दिया, वहीं कुछ ने इन्हीं संघर्षों को अपनी मजबूती बनाया. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है उदयपुर जिले के फालासिया गांव की रहने वाली युवती और निचली सिकरी गांव के युवक की.

युवती के पिता के निधन से टूटा था घर

युवती ने बचपन में ही पिता का साया खो दिया. पिता के असमय निधन के बाद परिवार पर आर्थिक तंगी के बादल छा गए. घर में कोई कमाने वाला नहीं था और सारी जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आन पड़ी. मां आज भी दूसरों के खेतों में मजदूरी करके किसी तरह परिवार का गुजारा करती हैं. युवती ने अपनी पढ़ाई 12वीं कक्षा तक पूरी की, लेकिन इन परिस्थितियों में उन्होंने शादी का सपना तक नहीं देखा था.

युवक ने कुबड़ेपन के बावजूद कभी हार नहीं मानी

वहीं, अपने ही गांव के पास निचली सिकरी गांव में रहने वाले युवक जन्म से ही कुबड़ापन (हंचबैक) की समस्या से ग्रसित हैं. इस कारण उन्हें चलने-फिरने और सामान्य गतिविधियों में भी दिक्कत होती है। युवक का परिवार भी बेहद साधारण है, उनके पिता मजदूरी करते हैं. लेकिन सीमित संसाधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद लोकेश ने सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को कभी जाने नहीं दिया.

समझ और भरोसे ने बढ़ाई रिश्ते की डोर

धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी. उन्होंने एक-दूसरे के संघर्षों, भावनाओं और जीवन की सच्चाइयों को समझा. यह रिश्ता किसी सहानुभूति पर आधारित नहीं था, बल्कि आपसी समझ, विश्वास और यह एहसास कि वे एक-दूसरे का सहारा बन सकते हैं, ने इसे मजबूत किया.

सेवा संस्थान में होगी सामूहिक शादी

परिवारों की सहमति मिलने के बाद अब कवी और लोकेश 46वें नि:शुल्क दिव्यांग सामूहिक विवाह समारोह में शादी के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे हैं. यह समारोह उनके जीवन में नई उम्मीदें और बेहतर भविष्य की शुरुआत लेकर आएगा. दोनों का सपना है कि वे एक ऐसा जीवन बनाएं जो प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग से भरा हो. उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो जीवन की मुश्किलों में हार मान बैठते हैं.



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