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शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य बनाने वाला आदेश सुप्रीम कोर्ट ने नहीं बदला, सिर्फ एक साल की दी मोहलत


देश भर में कक्षा 1 से VIII तक के शिक्षकों को टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) पास करना ही होगा. सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य बनाने वाला आदेश वापस लेने से मना कर दिया है. मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला देते हुए कोर्ट ने सिर्फ इतनी ही राहत दी है कि TET पास करने की समय सीमा एक साल बढ़ाकर 31 अगस्त, 2028 कर दी है.

क्या था पिछला आदेश?

एक सितंबर, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि जो शिक्षक बिना TET के नौकरी कर रहे हैं, उन्हें 2 साल में इसे पास करना होगा. अगर वह ऐसा नहीं करते तो उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ेगी या फिर उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा. यह आदेश उन सभी शिक्षकों के लिए था जिनकी नौकरी 5 वर्ष से अधिक बची थी. जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय बचा था, उनके लिए TET पास करना बाध्यकारी नहीं किया गया था, लेकिन यह साफ किया गया था कि अगर वह पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें TET पास करना होगा.

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RTE एक्ट की व्याख्या

पिछले साल आदेश देते समय जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की बेंच ने शिक्षा अधिकार कानून (RTE Act), 2009 के प्रावधानों की व्याख्या की थी. कोर्ट ने कहा था कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने 29 जुलाई 2011 को शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य किया था. ऐसे में बिना इस योग्यता के कोई शिक्षक नहीं बन सकता. अब एक बार फिर कोर्ट ने उन्हीं प्रावधानों को आधार बनाते हुए अपने फैसले को बदलने से मना कर दिया है.

अब और समय विस्तार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए टीचर का योग्य और प्रशिक्षित होना जरूरी हैं. कोर्ट ने गैर टीईटी शिक्षकों की बड़ी संख्या और टीईटी परीक्षा के आयोजन में राज्यों की नाकामी को देखते हुए पहले तय की गई समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है. कोर्ट ने साफ किया है कि इसके बाद कोई समय विस्तार नहीं दिया जाएगा. आदेश में कोर्ट ने शिक्षकों से अपील की कि वह सिर्फ अपनी नौकरी बचाने तक सीमित न रहें. बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता दें.

शिक्षक संगठन पहुंचे थे कोर्ट

पिछले साल आए फैसले में बदलाव के लिए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के शिक्षक संगठनों और कुछ राज्य सरकारों ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी. इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति RTE Act, 2009 लागू होने से पहले हुई, उन्हें टीईटी पास करने से छूट दी जाए, लेकिन कोर्ट ने इससे मना कर दिया है.

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