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Tulsi: दुनिया झुक रही है ‘श्यामा’ के आगे…आखिर क्यों मुस्लिम देशों में मच गई है भारतीय तुलसी की धूम?


Tulsi Demand: भारत की मिट्टी की खुशबू अब सात समंदर पार उन देशों की आबोहवा में घुल रही है, जहां की संस्कृति और परंपराएं हमसे बिल्कुल जुदा हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि जिस तुलसी (Holy Basil) को हम अपने आंगन की देवी मानते हैं, जिसकी हम सुबह-शाम जल चढ़ाकर पूजा करते हैं, वही ‘वृंदा’ अब दुनिया के बड़े मुस्लिम देशों की पहली पसंद बन गई है?

हालिया आंकड़ों और व्यापारिक रिपोर्टों ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है. बांग्लादेश, मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में भारतीय तुलसी की मांग में भारी उछाल आया है. यह सिर्फ व्यापार नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी ‘सांस्कृतिक जीत’ है जिसे शब्दों में पिरोना जरूरी है.

आंगन की श्रद्धा से विदेशी गलियारों तक का सफर

सनातन धर्म में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि ‘साक्षात् लक्ष्मी’ का रूप माना गया है. शास्त्रों में उल्लेख है कि जिस घर के आंगन में तुलसी का वास होता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती. लेकिन आज यह आस्था सीमाओं को लांघ चुकी है.

हाल ही में आई खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भारत से बड़े पैमाने पर तुलसी और उसके अर्क का निर्यात किया जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि ये देश इसे केवल एक वनस्पति के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘दिव्य औषधि’ के रूप में स्वीकार कर रहे हैं.

क्यों हो रही है इन देशों में ‘तुलसी’ की जय-जयकार?

इसके पीछे कई गहरे और तार्किक कारण हैं, जो विज्ञान और अध्यात्म के मिलन को दर्शाते हैं. असाध्य रोगों का रामबाण इलाज: इन देशों में आयुर्वेद के प्रति विश्वास बढ़ा है. कैंसर, मधुमेह (Diabetes) और सांस संबंधी रोगों में तुलसी के प्रभाव को वहां के वैज्ञानिकों ने भी स्वीकार किया है.

हलाल-सर्टिफाइड हर्बल क्रांति: मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों में ‘हलाल’ उत्पादों का विशेष महत्व है. तुलसी से बने उत्पाद प्राकृतिक और शुद्ध होते हैं, जिनमें किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित रसायनों का उपयोग नहीं होता. यही कारण है कि वहां के मुस्लिम समुदाय के बीच यह तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

तुलसी की चाय (The Miracle Drink): ढाका से लेकर कुआलालंपुर तक, भारतीय ‘तुलसी टी’ अब एक स्टेटस सिंबल बन चुकी है. तनाव को कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए वहां के लोग अब कैफीन छोड़ तुलसी के अर्क की ओर मुड़ रहे हैं.

क्या यह केवल व्यापार है या कुछ और?

धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो यह खबर हर भारतीय को गर्व से भर देने वाली है. जिस पौधे को हम ‘विष्णुप्रिया’ कहते हैं, उसकी महक आज उन घरों तक पहुंच रही है जहां की प्रार्थना पद्धतियां अलग हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि ‘सनातन संस्कृति’ द्वारा पूजित प्रकृति का हर अंश मानवता के कल्याण के लिए है.

‘तुलसी तुलना नास्ति अतएव तुलसी’ अर्थात: जिसकी तुलना किसी और से न की जा सके, वही तुलसी है.

जब हम मलेशिया और इंडोनेशिया या किसी अन्य देशों में घुमने जाते हैं और देखते हैं कि एक मुस्लिम व्यापारी अपनी दुकान पर ‘इंडियन होली बेसिल’ का बोर्ड लगाता है, तो वह अनजाने में ही सही, भारत की उस प्राचीन ऋषि परंपरा को नमन कर रहा होता है जिसने हजारों साल पहले तुलसी के महत्व को पहचान लिया था.

ग्लोबल मार्केट में तुलसी का बढ़ता कद

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में वैश्विक हर्बल मार्केट में तुलसी का योगदान अरबों डॉलर का होगा. पिछले तीन वर्षों में खाड़ी देशों को किए जाने वाले तुलसी निर्यात में 30-40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दुबई और सऊदी अरब के लग्जरी स्पा और ब्यूटी पार्लरों में अब तुलसी (Basil) युक्त फेस मास्क और ऑयल का इस्तेमाल ‘प्रीमियम सर्विस’ के तौर पर किया जा रहा है.

प्रकृति का कोई धर्म नहीं होता

यह समझना जरूरी है कि तुलसी भले ही हमारे लिए पूजनीय ‘मां’ के समान हो, लेकिन उसकी उपयोगिता पूरे विश्व के लिए एक वरदान है. बांग्लादेश और मलेशिया का तुलसी प्रेम यह साबित करता है कि जब बात ‘जीवन’ और ‘आरोग्य’ की आती है, तो सीमाओं की दीवारें और मजहबी दूरियां मिटने लगती हैं.

भारत की यह ‘हरी क्रांति’ आज दुनिया को स्वास्थ्य का संदेश दे रही है. यह महज एक पौधे का निर्यात नहीं है, बल्कि यह वसुधैव कुटुंबकम की उस भावना का विस्तार है, जहां भारत अपनी सबसे पवित्र संपदा को पूरी दुनिया के साथ साझा कर रहा है. आंगन की तुलसी यानी आपकी आस्था की यह महक आज पूरी दुनिया को सेहतमंद बना रही है.

FAQ

Q1. क्या मुस्लिम देशों में भारतीय तुलसी की मांग बढ़ रही है?

हां, बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और कई खाड़ी देशों में भारतीय तुलसी और उससे बने हर्बल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है.

Q2. तुलसी को विदेशों में किस रूप में इस्तेमाल किया जाता है?

तुलसी का उपयोग हर्बल चाय, अर्क (Extract), एसेंशियल ऑयल, स्किन केयर और वेलनेस उत्पादों में किया जाता है.

Q3. तुलसी को ‘क्वीन ऑफ हर्ब्स’ क्यों कहा जाता है?

आयुर्वेद में तुलसी को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. यही कारण है कि इसे जड़ी-बूटियों की रानी कहा जाता है.

Q4. क्या तुलसी केवल धार्मिक पौधा है?

नहीं. धार्मिक महत्व के अलावा तुलसी का उपयोग आयुर्वेद, हर्बल चिकित्सा और आधुनिक वेलनेस इंडस्ट्री में भी किया जाता है.

Q5. भारत में तुलसी का धार्मिक महत्व क्या है?

सनातन परंपरा में तुलसी को माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु से जुड़ा पवित्र पौधा माना जाता है. तुलसी पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है.

Q6. मुस्लिम देशों में भारतीय तुलसी की मांग क्यों बढ़ रही है?

भारतीय तुलसी की मांग बांग्लादेश, मलेशिया, इंडोनेशिया और खाड़ी देशों में बढ़ रही है क्योंकि इसे आयुर्वेदिक, प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक हर्ब के रूप में देखा जा रहा है. तुलसी से बने चाय, अर्क, तेल और हर्बल उत्पाद इम्युनिटी, तनाव प्रबंधन और वेलनेस सेक्टर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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