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Insurance Claim: जरूरत के समय धोखा दे सकता है आपका कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस, जानिए क्यों रिजेक्ट हो रहे हैं क्लेम


Health Insurance Claim: अक्सर स्वास्थ्य बीमा कार्ड होना मन को तसल्ली देती है. कई पॉलिसीधारकों का मानना ​​है कि एक बार स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीद लेने के बाद, जब भी उन्हें इलाज की जरूरत होगी, अस्पताल के बिल का भुगतान कैशलेस सुविधा के माध्यम से स्वतः ही हो जाएगा. लेकिन यह बात भी ध्यान में रखना होगी कि मंज़ूरी हमेशा अपने आप नहीं मिलती. कई कारक यह निर्धारित करते हैं कि क्लेम आसानी से मंजूर होगा या उसमें बाधाएं आएंगी.

लेकिन कभी हालात इससे बहुत अलग हो सकते है.  हर साल, कई पॉलिसीधारकों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जहां अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनका कैशलेस क्लेम रिजेक्ट, आंशिक रूप से स्वीकृत या यहां तक ​​कि रिजेक्ट हो जाता है. कई मामलों में, पॉलिसी सक्रिय होती है और प्रीमियम समय पर चुकाया गया होता है. फिर भी, मरीज़ और उनके परिवार अचानक खुद को ऐसे समय में पैसे की इंतेजाम करते हुए पाते हैं जब उनका ध्यान पूरा तरिके से इलाज और स्वस्थ होने पर होना चाहिए. इसकी वजह एक दम साफ है कि केवल सक्रिय स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होने से ही कैशलेस क्लेम की सफलता की गारंटी नहीं मिलती.

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कैशलेस क्लेम में दिक्कतें क्यों आ सकती हैं?

सबसे दिलचस्प बात यह है कि कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का मकसद अस्पताल में भर्ती होने की संचालन को बेहतर और आर्थिक रूप से कम तनावपूर्ण बनाना है, लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जहां संचालन उम्मीद के मुताबिक नहीं चलती.

पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के स्वास्थ्य बीमा व्यवसाय प्रमुख सिद्धार्थ सिंघल के अनुसार, ‘कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का मकसद अस्पताल में भर्ती होने की तरिका को बेहतर और आर्थिक रूप से कम तनावपूर्ण बनाना है, लेकिन कुछ ऐसी स्थितियां भी होती हैं जहाँ पॉलिसी सक्रिय होने के बावजूद कैशलेस क्लेम में देरी, आंशिक मंजूरी या नामंजूर हो सकती है. ज्यादातर मामलों में, यह फैसले पॉलिसी की स्थिति के बजाय पॉलिसी की शर्तों, दस्तावेज़ीकरण से जुड़ी जरूरतों पर तय की जाती है’. साथ ही कहा क्लेम संबंधी समस्याओं का एक खास वजह ठहराव की पाबंदियां है. 

हर इलाज का खर्च बीमा में शामिल नहीं होता

मिली जानकारी के मुताबिक, कई उपभोक्ता यह मान लेते हैं कि स्वास्थ्य बीमा होने पर अस्पताल का हर खर्च अपने आप कवर हो जाएगा. लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं है.

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सिंघल के अनुसार, ‘कुछ मामलों में, उपचार या प्रक्रिया बीमा के दायरे से बाहर हो सकती है. हर पॉलिसी में कुछ शर्तें और शिकायत होते हैं. कुछ प्रक्रियाएं, इलाज या मेडिकल खर्च पॉलिसी के दायरे में नहीं आते. इसीलिए विशेषज्ञ पॉलिसीधारकों को सलाह देते हैं कि वे केवल बीमा राशि और प्रीमियम पर ध्यान देने के बजाय पॉलिसी के शब्दों को ध्यान से पढ़ें. 



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