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इकोनॉमिक क्राइसिस से जूझता आतंकिस्तान, पाकिस्तान के आर्थिक संकट से कई बड़े प्रोजेक्ट्स ठप


पाकिस्तान की खराब होती आर्थिक हालत का असर अब विकास कार्यों पर भी साफ दिखने लगा है. पंजाब प्रांत के रावलपिंडी डिवीजन में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं. विकास के लिए मिलने वाले बजट में भी भारी कटौती की गई है.

पाकिस्तान के अखबार,  द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, नए फिस्कल ईयर में रावलपिंडी डिवीजन की सभी सरकारी विकास एजेंसियों का बजट कम कर दिया गया है. रावलपिंडी, अटक, झेलम, चकवाल, तलागंग और मरी के जिला विकास कार्यक्रमों में करीब 60 पर्सेंट तक कटौती हुई है.

क्या-क्या प्रोजेक्ट रुके?

रिपोर्ट के अनुसार, छह बड़ी परियोजनाओं को फिलहाल रोक दिया गया है. इनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं. ये दोनों परियोजनाएं पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख राशिद अहमद के क्षेत्र से जुड़ी मानी जाती हैं.

इसके अलावा, मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर का काम भी अब दिसंबर 2027 से पहले शुरू होने की उम्मीद नहीं है. रावलपिंडी में हर साल होने वाले जलभराव से निपटने के लिए बनाई गई भूमिगत सीवर टनल की योजना भी छोड़ दी गई है.

पानी की बड़ी योजना भी बंद

रावलपिंडी और इस्लामाबाद को लंबे समय तक पानी उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया गाजी बरोटा वाटर प्रोजेक्ट भी रद्द कर दिया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, इसकी लागत 17 अरब पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर करीब 110 अरब रुपये हो गई थी.

सरकार ने मियावाकी पद्धति से लगाए जाने वाले शहरी जंगलों के विस्तार पर भी रोक लगा दी है. जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि पिछले तीन साल में रावलपिंडी और आसपास के जिलों में इस तरह का कोई नया शहरी जंगल नहीं बनाया गया.

आगे क्या होगा?

अगर यह स्थिति पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से सटे रावलपिंडी की है, जिसे देश का अहम प्रशासनिक और सैन्य केंद्र माना जाता है, तो दूसरे शहरों और इलाकों में विकास कार्यों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने विकास एजेंसियों को साफ कर दिया है कि इन परियोजनाओं पर काम तभी दोबारा शुरू होगा, जब विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक (ADB) जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से धन मिलेगा.

रावलपिंडी डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व चेयरमैन तारिक मुर्तज़ा का कहना है कि उनके कार्यकाल में लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट जैसी परियोजनाओं को मंजूरी मिलने के साथ फंड भी तय हो गया था. लेकिन सरकार बदलने के बाद इन योजनाओं को आगे नहीं बढ़ाया गया.

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