21 जुलाई 2026 को नई दिल्ली की सड़कों पर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया. ‘चलो संसद’ मार्च के अगले दिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ देश के सबसे संवेदनशील इलाके में धरना दे दिया. यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर 7, लोक कल्याण मार्ग के बाहर. कांग्रेस का धरना CJP के आंदोलन की पीठ थपथपा रहा है. अब यह लड़ाई सरकार बनाम विपक्ष बन चुकी है. ऐसे में क्या धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा लिखने को मजबूर हो जाएंगे और यह मुद्दा कैसे राजनीतिक बन गया…
PM मोदी के घर के बाहर कांग्रेस ने कैसे किया सरप्राइज प्रोटेस्ट?
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल और पवन खेड़ा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता PM आवास के बाहर धरने पर बैठ गए. कांग्रेस का यह प्रदर्शन बेहद सीक्रेट रहा. राहुल समेत सभी नेता कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के घर से PM आवास तक पैदल मार्च करके पहुंचे. जब ये लोग 100 मीटर दूर थे तब मीडिया को जानकारी दी गई. उनके हाथों में तख्तियां थीं और मुंह पर ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे थे. कांग्रेस ने मांग की:
- प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का इस्तीफा: कांग्रेस नेताओं ने 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की.
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: कांग्रेस ने NEET पेपर लीक के मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की.
- संसद में चर्चा: इससे पहले दिन ही राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के सांसदों के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर संसद में चर्चा की मांग रखी थी.
दिल्ली पुलिस ने पंजाब के पूर्व सीएम और कांग्रेस सांसद चरणजीत चन्नी समेत कई कांग्रेसी नेताओं को धरना स्थल से हिरासत में ले लिया.
राहुल गांधी ने इस मौके पर सरकार पर जमकर निशाना साधा. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘हम कल की युवाओं के खिलाफ हुई क्रूरता का जवाब मांगने PM मोदी के घर आए हैं. सरकार न तो कोई जवाबदेही लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है. PM और गृह मंत्री को भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए इस्तीफा देना चाहिए.’
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को देश का ‘सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री’ करार दिया. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘पेपर लीक के जिम्मेदार लोग आजाद घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्वक विरोध करने वाले छात्रों को पीटा जा रहा है.’
राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि देशभर में 152 परीक्षा पेपर लीक हुए हैं, जिससे करीब 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं.
क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब हो जाएगा?
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई इस सवाल के जवाब में नहीं कहते हैं. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस का सड़क पर उतरना और PM आवास के बाहर धरना देना निश्चित रूप से एक बड़ा राजनीतिक दबाव है. लेकिन इस्तीफा तभी होता है जब सरकार या मंत्री खुद को असहज महसूस करें या विपक्ष उसे मजबूर कर दे.’
रशीद किदवई इस्तीफा न होने की तीन बड़ी वजहें बताते हैं:
- सरकार का मजबूत रुख: सरकार ने अब तक कोई नरमी नहीं दिखाई है. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं, जो इस्तीफे की अटकलों को खारिज करने जैसा था.
- धर्मेंद्र प्रधान का बयान: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CJP को ‘आतंकवादियों की B-टीम’ करार दिया था. यह साफ संकेत था कि सरकार आंदोलन को गंभीरता से नहीं ले रही है.
- संसदीय गणित: सरकार के पास लोकसभा में बहुमत है और विपक्ष की एकजुटता भी पूरी तरह से मजबूत नहीं है. कांग्रेस का यह कदम भले ही सुर्खियां बटोर रहा हो, लेकिन सरकार पर इस्तीफा देने का कोई कानूनी या संख्यात्मक दबाव नहीं है.
कांग्रेस के समर्थन से कितनी बदलेगी तस्वीर?
रशीद किदवई के मुताबिक, कांग्रेस का खुलेआम CJP आंदोलन का समर्थन करना और PM आवास के बाहर धरना देना एक गेम-चेंजर हो सकता है, लेकिन यह दोधारी तलवार भी है…
CJP के लिए फायदे:
- राष्ट्रीय मुद्दा बना: CJP का आंदोलन अब सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा. कांग्रेस के सड़क पर उतरने से यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस बन गया है.
- राजनीतिक वैधता: विपक्ष के नेता का समर्थन मिलने से CJP की मांगों को राजनीतिक वैधता मिली है.
- संसद में दबाव: राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की है. अगर यह चर्चा होती है, तो सरकार को जवाब देना होगा.
- जनसमर्थन बढ़ा: कांग्रेस का समर्थन और PM आवास के बाहर धरना, सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया में इस मुद्दे को और रफ्तार देगा.
CJP के लिए नुकसान:
- राजनीतिक रंग: कांग्रेस का समर्थन CJP के ‘अराजनीतिक’ होने के दावे को कमजोर कर सकता है. सरकार इसे ‘कांग्रेस की साजिश’ करार दे सकती है.
- सरकार का और सख्त रुख: कांग्रेस के सड़क पर आने से सरकार और सख्त हो सकती है और बातचीत की संभावनाएं और कम हो सकती हैं.
- सोनम वांगचुक की स्थिति: सोनम वांगचुक ने साफ कहा है कि वह तब तक अनशन जारी रखेंगे जब तक युवा नेताओं को संसद में सांसदों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाती. कांग्रेस का समर्थन भले ही आंदोलन को बड़ा करे, लेकिन सोनम की व्यक्तिगत लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
दिल्ली के लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं
लोक कल्याण मार्ग पर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है. यह एक बहुत संवेदनशील और VVIP इलाका है. यहां अक्सर निषेधाज्ञा (सेक्शन 163 BNSS/धारा 144) लागू रहती है, जिसके तहत 5 या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने या मार्च निकालने पर सख्त पाबंदी होती है. प्रधानमंत्री आवास की सुरक्षा में विशेष सुरक्षा समूह (SPG) तैनात रहता है, जिसे दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों (पैरामिलिट्री फोर्सेज) का सहयोग मिलता है.
