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Guru Ast 2026: 15 जुलाई को कर्क राशि में अस्त होंगे देवगुरु बृहस्पति, जानें किन राशियों को रहना होगा सतर्क


Guru Ast 2026:  वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान, विवाह, समृद्धि और सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है. किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य में गुरु ग्रह की विशेष भूमिका मानी गई है. ऐसे में जब गुरु ग्रह अस्त होते हैं तो इसका प्रभाव केवल 12 राशियों पर ही नहीं, बल्कि विवाह, गृह प्रवेश और अन्य धार्मिक कार्यों पर भी देखने को मिलता है. 

इस वर्ष 15 जुलाई 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में अस्त होने जा रहे हैं. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर-जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, गुरु के अस्त होने के साथ ही कई शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा और कुछ राशियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी.

डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि गुरु ग्रह 2 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे. इस अवधि के बीच 15 जुलाई को सुबह 11:10 बजे गुरु पूर्व दिशा में अस्त होंगे और 10 अगस्त को पश्चिम दिशा में उदित होंगे. ज्योतिष में गुरु की यह अस्त अवधि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है.

गुरु अस्त होने का क्या होता है अर्थ?

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, वैदिक ज्योतिष में जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट पहुंच जाता है तो उसकी चमक दिखाई नहीं देती. इस स्थिति को ग्रह का अस्त (Combust) होना कहा जाता है. माना जाता है कि इस समय ग्रह अपनी पूर्ण शुभ शक्ति से फल नहीं दे पाता. चूंकि बृहस्पति को देवताओं का गुरु और शुभता का प्रतीक माना गया है, इसलिए उनके अस्त होने का प्रभाव धार्मिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ता है.

क्यों रुक जाते हैं विवाह और अन्य शुभ कार्य?

ज्योतिष शास्त्र में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण, मुंडन और मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे मांगलिक कार्यों में गुरु ग्रह की उपस्थिति को अत्यंत शुभ माना गया है. गुरु के अस्त होने के कारण इन कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है.

इसी बीच 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास भी शुरू हो जाएगा. चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भी विवाह सहित अधिकांश शुभ कार्य नहीं किए जाते. इसके बाद 21 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागरण के साथ दोबारा विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों का शुभारंभ होगा.

विवाह में गुरु ग्रह का क्यों है विशेष महत्व?

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में विवाह का मुहूर्त तय करते समय केवल तिथि और नक्षत्र ही नहीं, बल्कि सूर्य, चंद्रमा और गुरु की गोचर स्थिति का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. इसे त्रिबल शुद्धि कहा जाता है.

उनके अनुसार, अगर विवाह के समय सूर्य, चंद्रमा या गुरु अशुभ भावों में गोचर कर रहे हों तो विवाह का मुहूर्त उचित नहीं माना जाता. यही कारण है कि गुरु के अस्त रहने की अवधि में विवाह और अन्य प्रमुख संस्कारों को टालने की परंपरा रही है.

धार्मिक जीवन और समाज पर क्या होगा असर?

गुरु ग्रह धर्म, ज्ञान और सदाचार के प्रतीक माने जाते हैं. इसलिए उनके अस्त होने पर लोगों का झुकाव आध्यात्मिकता की अपेक्षा भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर अधिक हो सकता है. धार्मिक कार्यों में मन कम लग सकता है और परिवार के स्वास्थ्य तथा रिश्तों को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता पड़ सकती है. हालांकि यह प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी दिख सकता है प्रभाव:

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास का कहना है कि गुरु ग्रह का संबंध धन, समृद्धि और आर्थिक स्थिरता से भी माना जाता है. इसलिए गुरु अस्त की अवधि में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और बड़े निवेश सोच-समझकर करने चाहिए. उनका मानना है कि इस दौरान जल्दबाजी में आर्थिक निर्णय लेने से बचना बेहतर रहेगा.

किन राशियों को रहना होगा सबसे ज्यादा सतर्क?

गुरु अस्त का सबसे अधिक प्रभाव कर्क, धनु और मीन राशि के लोगों पर पड़ सकता है. इन राशि वालों को इस अवधि में नया व्यापार शुरू करने, बड़ी रकम निवेश करने और जोखिम भरे फैसले लेने से बचना चाहिए. पारिवारिक विवादों से दूरी बनाए रखना और वाणी पर संयम रखना भी लाभदायक रहेगा.

वहीं वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला राशि के लोगों के लिए यह समय कई मामलों में सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है. करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, आय के नए स्रोत बन सकते हैं और सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है.

सभी 12 राशियों पर गुरु अस्त का प्रभाव:

मेष: धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी और परिवार के साथ तीर्थ यात्रा की योजना बन सकती है.

वृषभ: खर्च बढ़ सकते हैं. स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में सतर्क रहें.

मिथुन: सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और नए संपर्क भविष्य में लाभ देंगे.

कर्क: अनावश्यक यात्राओं से बचें और हर निर्णय सोच-समझकर लें.

सिंह: व्यापार में प्रगति होगी और पारिवारिक संबंध मजबूत होंगे.

कन्या: वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा तथा पुराने विवाद समाप्त हो सकते हैं.

तुला: आध्यात्मिक रुचि बढ़ेगी, लेकिन अति आत्मविश्वास से बचना होगा.

वृश्चिक: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक मेहनत करनी होगी.

धनु: नौकरी में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है और माता-पिता से मतभेद हो सकते हैं.

मकर: जीवनसाथी के साथ गलतफहमियों से बचें और धैर्य बनाए रखें.

कुंभ: आर्थिक मामलों में सावधानी रखें और सोच-समझकर बोलें.

मीन: कार्यक्षेत्र में सम्मान मिलेगा, लेकिन फिलहाल निवेश से बचना बेहतर रहेगा.

गुरु अस्त के दौरान करें ये आसान उपाय:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए पीले वस्त्र धारण करें, पीली वस्तुओं का दान करें, गुरुजनों और बुजुर्गों का सम्मान करें, प्रतिदिन योग एवं ध्यान करें और केले के वृक्ष की पूजा करें. इसके अलावा किसी भी बड़े निर्णय से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना लाभकारी रहेगा.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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