- हालिया मातृ मृत्यु के बाद राजस्थान सरकार एक्शन मोड में.
- 15-19 जुलाई तक विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलेगा राज्यभर में.
- जोखिम गर्भवती पहचान, नियमित निगरानी, बेहतर उपचार सुनिश्चित.
प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए करीब 18 प्रसूताओं की मौत के मामलों के बाद राजस्थान सरकार एक्शन मोड में आ गई है. मातृ मृत्यु दर को कम करने और हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की समय पर पहचान के लिए सरकार ने पूरे प्रदेश में 15 जुलाई से 19 जुलाई तक पांच दिवसीय विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाने का फैसला किया है. इस अभियान के तहत हर गर्भवती महिला की स्वास्थ्य जांच होगी और उसके स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाएगी. यह अभियान आज से शुरू हो गया है.
मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सभी जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. उन्होंने साफ कहा कि अभियान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. फील्ड में काम कर रहे आशा वर्कर, एएनएम, सीएचओ और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी.
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सरकार ने दिए सख्त निर्देश
सरकार ने निर्देश दिए हैं कि हर गर्भवती महिला का गर्भधारण के पहले 12 सप्ताह के भीतर पंजीकरण कराया जाए और सभी जानकारी समय पर प्रेग्नेंसी, चाइल्ड ट्रैकिंग एंड हेल्थ सर्विसेज मैनेजमेंट सिस्टम (PCTS) पोर्टल पर दर्ज हों. साथ ही प्रत्येक गर्भवती की कम से कम चार प्रसवपूर्व (ANC) जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएगी. जांच में ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, वजन, ब्लड शुगर, यूरिन टेस्ट सहित सभी जरूरी स्वास्थ्य जांच शामिल रहेंगी.
रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों पर विशेष फोकस
बैठक में हाई रिस्क प्रेग्नेंसी वाले मामलों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए. एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, जुड़वां गर्भ, पूर्व सिजेरियन और अत्यधिक रक्तस्राव जैसी जटिलताओं वाली महिलाओं की अलग से सूची तैयार कर उनकी लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी.
मातृ मृत्यु को 24 घंटे के भीतर किया जाएगा रिव्यू
सरकार ने यह भी तय किया है कि मातृ मृत्यु की हर घटना का 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिव्यू किया जाएगा. सभी अस्पतालों में जीवनरक्षक दवाएं, रक्त की उपलब्धता, लेबर रूम, ऑपरेशन थिएटर और नवजात पुनर्जीवन उपकरण पूरी तरह तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही लेबर रूम और ओटी की गाइडलाइन का सख्ती से पालन और नियमित सैनिटाइजेशन सुनिश्चित करने को कहा गया है.
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल जांच करना नहीं, बल्कि समय रहते जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है, ताकि भविष्य में प्रसूताओं की मौत जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके.
प्रसूताओं की मौत से हड़कंप
बता दें कि राज्य में करीब 18 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. ताजा मामला भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल का है, जहां 6 दिन के भीतर 5 महिलाओं की मौत से हड़कंप मच गया है. इससे पहले बासवांड़ा जिले में 5 प्रसूताओं और कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जे.के. लोन अस्पताल में 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है. इसके अलावा बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में गंभीर संक्रमण और किडनी फेल होने के कारण 6 महिलाओं की तबीयत खराब हुई और बाद में इनमें से 2 महिलाओं की मौत हो गई थी.
