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जोधपुर: जेल में सजेगा मंडप… सात जन्मों के बंधन में बंधेंगे 2 हत्या के सजायाफ्ता कैदी


जोधपुर की खुली जेल से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को चौंका दिया है. हत्या के दो सजायाफ्ता बंदी खेतों में काम करते-करते एक-दूसरे को दिल दे बैठे. अब राजस्थान हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद 22 जुलाई को जेल परिसर में ही दोनों सात फेरे लेंगे.अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिलने वाले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना है. 

दरअसल, जोधपुर के मंडोर स्थित ओपन एयर कैंप में सजा काट रहे हत्या के दोषी मुलाराम और अपने पति की हत्या के मामले में सजायाफ्ता सीमा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. खुली जेल में खेतों पर काम करने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई. बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया. अब दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया है.

कोर्ट से मिली इजाजत

राजस्थान हाईकोर्ट की जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने दोनों को विवाह की अनुमति देते हुए कहा कि दो बालिग व्यक्तियों का अपनी इच्छा से विवाह करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है.

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मुलाराम नागौर जिले के एडसिंगा गांव का निवासी है. वर्ष 2023 में उसे हत्या, साक्ष्य मिटाने और संपत्ति के दुरुपयोग के मामले में दोषी ठहराया गया था. अच्छे आचरण के कारण वह मंडोर ओपन एयर कैंप में रह रहा है. वहीं सीमा भी हत्या के मामले में सजा काट रही है और फिलहाल पैरोल पर बाहर है.

 

सरकार की तरफ से भी मिला ग्रीन सिग्नल

दोनों ने अदालत को बताया कि वे अपनी इच्छा से विवाह करना चाहते हैं और यह उनके सामाजिक पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा. राज्य सरकार ने भी अपनी रिपोर्ट में विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई.

22 जुलाई को होगी शादी

हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि 22 जुलाई को निर्धारित नियमों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच विवाह संपन्न कराया जाए. समारोह में दोनों पक्षों के अधिकतम 21-21 परिजनों को शामिल होने की अनुमति होगी. विवाह का पूरा खर्च दोनों पक्ष स्वयं वहन करेंगे. यह फैसला केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सजा काट रहे बंदियों को भी संविधान के तहत सम्मानपूर्वक जीवन जीने और सामाजिक पुनर्वास का अधिकार है.

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