शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों के टूट कर शिवसेना शिंदे में शामिल होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. मंगलवार, 21 जुलाई को शिवसेना यूबीटी के वकील ने मामले पर तत्काल सुनवाई की मांग की. चीफ जस्टिस ने उन्हें मामले को जल्द सुनवाई के लिए लगाने का आश्वासन दिया.
उद्धव गुट की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने मामला रखते हुए कहा, “दोनों धड़ों के बीच का विवाद पहले से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. स्पीकर ने सांसदों के विलय को मान्यता दे दी है. इस तरह हमारी पार्टी अब संसद में काम नहीं कर पाएगी. यह संसद के मौजूदा सत्र को प्रभावित करने के लिए लिया गया फैसला है.”
ये भी पढें: CJP Protest LIVE: संसद मार्च में घायल लड़की वेंटिलेटर पर, राहुल गांधी-केजरीवाल-जेपी नड्डा भी RML पहुंचे
एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए
ध्यान रहे कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 6 सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं. विलय करने वाले 6 सांसद हैं- संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व), नागेश पाटिल-अष्टिकार (हिंगोली), ओमप्रकाश राजेनिंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी). इस विलय को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मान्यता दे चुके हैं. विलय के बाद शिवसेना (शिंदे) के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के पास अब सिर्फ 3 सांसद रह गए हैं.
सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवसेना यूबीटी
स्पीकर के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची शिवसेना यूबीटी का कहना है कि संसद का सत्र शुरू होने से ठीक पहले देर रात जारी किए गए इस आदेश ने उनकी पार्टी के संसदीय कामकाज को पूरी तरह से ठप कर दिया है. पार्टी का यह भी कहना है कि निर्वाचित सांसद उसकी सहमति के बिना किसी प्रतिद्वंद्वी दल में विलय नहीं कर सकते.
पहले से लंबित है विवाद
2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना में हुई बगावत के बाद उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र की सत्ता गंवानी पड़ी थी. 17 फरवरी 2023 को चुनाव आयोग ने शिवसेना पर एकनाथ शिंदे के दावे को सही पाया था. आयोग ने शिवसेना का मूल चुनाव चिन्ह ‘तीर-धनुष’ शिंदे गुट को आवंटित कर दिया था. उद्धव खेमा इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. तब से मामला लंबित है.
ये भी पढें: ‘कल जो हुआ वो बहुत…’, संसद मार्च के दौरान लाठीचार्ज पर फायर हुए असदुद्दीन ओवैसी, दिखाया अतीत का आईना
