तमिलनाडु की विजय सरकार को मद्रास हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने पिछले साल करूर में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट का कहना है कि भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करता है. पिछले साल सितंबर में करूर जिले में टीवीके की रैली के दौरान भगदड़ मच गई थी. विजय को सुनने के लिए वहां भारी संख्या में लोग पहुंचे थे. इस हादसे में 41 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे. सीबीआई इस मामले की जांच कर रही है.
मद्रास हाई कोर्ट ने विजय सरकार के फैसले को पलटा
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का आदेश बरकरार रखने से भविष्य में अन्य लोग भी इसी तरह रोजगार की मांग करने लगेंगे जिससे ऐसे दावों की बाढ़ आ जाएगी.’ सुनवाई के बाद कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार का आदेश रद्द कर दिया. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के 31 परिजनों को 10 जुलाई 2026 को नियुक्ति पत्र सौंपे थे.
करूर भगदड़ में 41 लोगों की हुई थी मौत
यह हादसा करूर के वेलुचामिपुरम में 27 सितंबर को विजय के नेतृत्व में आयोजित रैली में हुआ था. भीड़ में अचानक भगदड़ मचने से 41 लोगों की मौत हो गई थी और कम से कम 110 अन्य घायल हो गए थे. हादसे के बाद इस घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठी थी. मामले पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को एक अंतरिम आदेश जारी कर जांच सीबीआई को सौंप दी थी. कोर्ट ने जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई.
सीबीआई मामले की जांच कर रही
इसके बाद सीबीआई ने अपनी जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसी अब तक इस मामले में पूछताछ के लिए टीवीके के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों को बुला चुकी है. जांच एजेंसी के सामने पेश होने वालों में टीवीके के प्रदेश महासचिव बुस्सी आनंद, संयुक्त सचिव निर्मल कुमार और अधव अर्जुन और करूर पश्चिम जिला सचिव मथियाझगन शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त कमेटी की देखरेख में जांच जारी है, क्योंकि सीबीआई संभावित कमियों की जांच कर रही है और हाल के समय के चुनाव अभियान से जुड़ी दुर्घटनाओं में से एक में जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रही है.
