परिवहन कारोबार से जुड़ी कई समस्याओं को लेकर दिल्ली टैक्सी एंड टूरिस्ट ट्रांसपोर्टर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें एक ज्ञापन सौंपकर ट्रांसपोर्टर्स की समस्याओं से अवगत कराया. संगठन का कहना है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया तो संगठन के द्वारा 4 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा.
ट्रांसपोर्टर्स ने उठाए ये मुद्दे
प्रतिनिधिमंडल ने गडकरी के सामने VLTD (Vehicle Location Tracking Device) और पैनिक बटन व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया. इसके अलावा ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों की सुरक्षा, कमर्शियल वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड लिमिट, बढ़ते ट्रैफिक चालान, ऑटो, टैक्सी और स्कूल बसों को अनिवार्य रूप से इलेक्ट्रिक करने, BS-4 कमर्शियल वाहनों पर रोक, कमर्शियल वाहनों के लिए राहत योजना और E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी अपनी चिंताएं रखीं.
एसोसिएशन का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर के हजारों ट्रांसपोर्टर्स बढ़ते नियमों, भारी जुर्मानों और महंगी नीतियों की वजह से आर्थिक संकट झेल रहे हैं. संगठन के मुताबिक, स्कूल बस संचालकों ने भी कहा कि अगर CNG बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसें अनिवार्य की गईं तो उनकी लागत कई गुना बढ़ जाएगी. इसका सीधा असर अभिभावकों पर पड़ेगा और स्कूल फीस भी बढ़ सकती है.
नितिन गडकरी ने क्या कहा?
ट्रांसपोर्टर संगठन के मुताबिक बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने VLTD और स्पीड लिमिट से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक तरीके से विचार करने और समाधान निकालने का भरोसा दिया. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का मामला पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है. इस मुद्दे पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से बात की जानी चाहिए.
4 अगस्त को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
एसोसिएशन का कहना है कि परिवहन उद्योग की समस्याओं के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. इसी वजह से 4 अगस्त 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. संगठन के मुताबिक इस प्रदर्शन में देशभर से टैक्सी, टूरिस्ट, स्कूल बस और अन्य कमर्शियल वाहन संचालक शामिल होंगे.
संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि परिवहन उद्योग की व्यावहारिक समस्याओं को समझते हुए ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिनसे पर्यावरण की सुरक्षा भी हो और इस उद्योग से जुड़े लाखों लोगों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रह सके.
