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Marathon Runner Death : मैराथन रनर की दौड़ते-दौड़ते मौत, क्या फिट दिखने वाले भी खतरे में?


Marathon Runner Death : कर्नाटक के नंदी हिल्स में आयोजित मानसून मैराथन के दौरान 31 वर्षीय अमनदीप सिंह जगदे की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई. उन्हें पहले मेडिकल कैंप ले जाया गया और हालत गंभीर होने पर एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी. डॉक्टरों को शुरुआती तौर पर अचानक कार्डियक अरेस्ट की आशंका है, हालांकि मौत की सही वजह पोस्टमार्टम के बाद ही साफ होगी.

उनके साथ दौड़ रहे लोगों के मुताबिक अमनदीप पूरी तरह फिट और उत्साहित दिखाई दे रहे थे. वह पहले भी कई मैराथन में हिस्सा ले चुके थे और हाल ही में एक Hyrox प्रतियोगिता भी जीती थी.  ऐसे में आइए सवाल उठ रहा है कि  जो व्यक्ति बाहर से पूरी तरह फिट और स्वस्थ नजर आता है, उसे अचानक इतनी गंभीर परेशानी कैसे हो सकती है. तो आइए जानते हैं कि क्या फिट दिखने वाले भी खतरे में है. 

कार्डियक अरेस्ट में क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है. इसके कारण दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों तक ब्लड और ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक सकती है. कुछ मामलों में यह बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के भी हो सकता है. इसके प्रमुख कारणों में हार्ट की धड़कन की गड़बड़ी यानी एरिथमिया, वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, कार्डियोमायोपैथी और कोरोनरी आर्टरी डिजीज शामिल हैं. ज्यादा ब्लीडिंग, हार्ट के वाल्व से जुड़ी बीमारी, ऑक्सीजन की कमी और मैग्नीशियम साथ ही पोटेशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन से भी इसका खतरा हो सकता है. 

क्या फिट दिखने वाले भी खतरे में है?

बाहर से फिट और स्वस्थ दिखने वाला व्यक्ति भी कभी-कभी अंदरूनी स्वास्थ्य समस्या का शिकार हो सकता है. सिर्फ अच्छी फिटनेस या नियमित एक्सरसाइज करने से यह तय नहीं होता कि दिल और शरीर के सभी अंग पूरी तरह स्वस्थ हैं. कुछ बीमारियां या हार्ट से जुड़ी परेशानियां लंबे समय तक बिना किसी बड़े लक्षण के रह सकती हैं और अचानक गंभीर हो सकती हैं. इसलिए खुद को फिट रखने के साथ-साथ समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना और शरीर में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करना भी जरूरी है. 

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शरीर के इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

लगातार और बिना वजह थकान, बार-बार चक्कर आना या सिरदर्द, बिना कारण वजन कम या ज्यादा होना, भूख या नींद में बदलाव, लगातार पाचन संबंधी परेशानी, सांस फूलना या सीने में बेचैनी जैसे लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है. इसी तरह बार-बार संक्रमण होना, घावों का देर से भरना और लगातार या असामान्य शरीर दर्द भी किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है. अगर कोई लक्षण बिना स्पष्ट कारण के दो-तीन हफ्ते से ज्यादा बना रहे, बार-बार हो या उसकी प्रकृति बदल रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. 
 
कौन से टेस्ट करवाते रहना चाहिए?

नियमित स्वास्थ्य जांच से कई बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, 30 साल की उम्र से सालाना स्क्रीनिंग में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और थायराइड जैसी जांचों पर ध्यान दिया जा सकता है. नियमित जांच की मदद से बीमारी मिलने पर इलाज करने के साथ शुरुआती चरण में पहचानना भी है. प्रीडायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, डिसलिपिडेमिया और थायराइड जैसी समस्याओं का समय रहते पता लगने से उन्हें कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. 

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें 

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