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मानसून में पहाड़ घूमते वक्त न करें ये गलतियां, हो सकता है जानलेवा


सबसे पहली और बड़ी गलती है मौसम चेक किए बिना यात्रा शुरू करना.  बहुत से लोग बिना यह जाने कि अगले कुछ दिनों में मौसम कैसा रहेगा, अपनी यात्रा शुरू कर देते हैं. पहाड़ी इलाकों में मौसम बहुत जल्दी बदलता है और भारी बारिश की चेतावनी होने पर यात्रा टाल देना ही समझदारी होती है. यात्रा से पहले भारतीय मौसम विभाग यानी IMD की वेबसाइट या ऐप पर जाकर मौसम की जानकारी जरूर लनी चाहिए. 

दूसरी गलती है भूस्खलन वाले इलाकों में जोखिम उठाना. मानसून के दौरान पहाड़ी सड़कों पर जगह-जगह भूस्खलन की चेतावनी के बोर्ड लगे होते हैं. कई बार लोग जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसा करना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि भारी बारिश में पहाड़ का मलबा और पत्थर बिना किसी चेतावनी के सड़क पर गिर सकते हैं. 

दूसरी गलती है भूस्खलन वाले इलाकों में जोखिम उठाना. मानसून के दौरान पहाड़ी सड़कों पर जगह-जगह भूस्खलन की चेतावनी के बोर्ड लगे होते हैं. कई बार लोग जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में इन चेतावनियों को नजरअंदाज कर देते हैं. ऐसा करना बहुत खतरनाक हो सकता है, क्योंकि भारी बारिश में पहाड़ का मलबा और पत्थर बिना किसी चेतावनी के सड़क पर गिर सकते हैं. 

तीसरी गलती है नदी या झरने के बहुत पास जाकर फोटो खींचना. मानसून में पहाड़ी नदियां और झरने बहुत तेज बहाव के साथ बहते हैं. पानी का स्तर कुछ ही मिनटों में अचानक बढ़ सकता है. इसलिए नदी या झरने के किनारे बहुत पास जाकर सेल्फी या फोटो लेने से बचना चाहिए, क्योंकि हर साल ऐसी लापरवाही की वजह से कई हादसे होते हैं. 

तीसरी गलती है नदी या झरने के बहुत पास जाकर फोटो खींचना. मानसून में पहाड़ी नदियां और झरने बहुत तेज बहाव के साथ बहते हैं. पानी का स्तर कुछ ही मिनटों में अचानक बढ़ सकता है. इसलिए नदी या झरने के किनारे बहुत पास जाकर सेल्फी या फोटो लेने से बचना चाहिए, क्योंकि हर साल ऐसी लापरवाही की वजह से कई हादसे होते हैं. 

चौथी गलती है रात के समय पहाड़ी सड़कों पर गाड़ी चलाना.  मानसून में पहाड़ी रास्तों पर घना कोहरा और कम रोशनी की वजह से रास्ता साफ दिखाई नहीं देता. रात में सड़क पर गड्ढे, गिरे हुए पत्थर या फिसलन का पता नहीं चलता.  ऐसे में हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए दिन में उजाला रहते हुए ही यात्रा पूरी करने की कोशिश करनी चाहिए. 

चौथी गलती है रात के समय पहाड़ी सड़कों पर गाड़ी चलाना.  मानसून में पहाड़ी रास्तों पर घना कोहरा और कम रोशनी की वजह से रास्ता साफ दिखाई नहीं देता. रात में सड़क पर गड्ढे, गिरे हुए पत्थर या फिसलन का पता नहीं चलता.  ऐसे में हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए दिन में उजाला रहते हुए ही यात्रा पूरी करने की कोशिश करनी चाहिए. 

पांचवीं गलती है गाड़ी की सही जांच किए बिना यात्रा पर निकलना.  पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई और उतराई ज्यादा होती है, इसलिए गाड़ी के ब्रेक, टायर और वाइपर का सही हालत में होना बहुत जरूरी है. बारिश में गीली सड़क पर पुराने या घिसे हुए टायर फिसलने का खतरा बढ़ा देते हैं. यात्रा शुरू करने से पहले गाड़ी की पूरी जांच जरूर करवा लें. 

पांचवीं गलती है गाड़ी की सही जांच किए बिना यात्रा पर निकलना.  पहाड़ी रास्तों पर चढ़ाई और उतराई ज्यादा होती है, इसलिए गाड़ी के ब्रेक, टायर और वाइपर का सही हालत में होना बहुत जरूरी है. बारिश में गीली सड़क पर पुराने या घिसे हुए टायर फिसलने का खतरा बढ़ा देते हैं. यात्रा शुरू करने से पहले गाड़ी की पूरी जांच जरूर करवा लें. 

आखिर में, बिना जरूरी सामान लिए यात्रा पर निकलना भी एक बड़ी गलती है.  मानसून में पहाड़ों पर मोबाइल नेटवर्क अक्सर काम नहीं करता और मौसम की वजह से रास्ते बंद भी हो सकते हैं. ऐसे में साथ में रेनकोट, टॉर्च, जरूरी दवाइयां, गर्म कपड़े और कुछ खाने-पीने का सामान जरूर रखें. इस तरह अगर आप छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो मानसून में पहाड़ों की यात्रा खतरनाक नहीं बल्कि यादगार बन सकती है. 

आखिर में, बिना जरूरी सामान लिए यात्रा पर निकलना भी एक बड़ी गलती है.  मानसून में पहाड़ों पर मोबाइल नेटवर्क अक्सर काम नहीं करता और मौसम की वजह से रास्ते बंद भी हो सकते हैं. ऐसे में साथ में रेनकोट, टॉर्च, जरूरी दवाइयां, गर्म कपड़े और कुछ खाने-पीने का सामान जरूर रखें. इस तरह अगर आप छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो मानसून में पहाड़ों की यात्रा खतरनाक नहीं बल्कि यादगार बन सकती है. 

Published at : 10 Aug 2026 09:59 PM (IST)

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