झारखंड की राजधानी रांची में 10 अगस्त 2026 को एक अजीब और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला. हजारों की तादाद में नौजवान विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे, हाथों में तिरंगा और थे. सबसे खास बात, उनमें से कई के हाथों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत शिबू सोरेन की तस्वीर थी. यह वही शिबू सोरेन हैं जिनके बेटे हेमंत सोरेन आज झारखंड के मुख्यमंत्री हैं. आखिर छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए उन्हीं के पिता की फोटो क्यों लेकर चल रहे थे…
फटाफट समझ लें कि मामला क्या है?
पिछले करीब 17 दिनों से झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र और नौकरी के इच्छुक युवा सड़कों पर उतरे हुए हैं. उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करना
- सभी अनियमितताओं की CBI जांच
- भ्रष्टाचार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
सरकार ने रविवार (9 अगस्त) को छात्रों से छह घंटे की बातचीत के बाद 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने पर सहमति जताई. JPSC के तीनों सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन छात्र अपनी बाकी मांगों और खासकर JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच की मांग पर अड़े रहे.
10 अगस्त को विधानसभा मार्च में क्या हुआ?
10 अगस्त मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 51वां जन्मदिन था. इसी दौरान छात्रों ने ‘विधानसभा घेराव’ का ऐलान किया. ओल्ड विधानसभा परिसर से करीब 10 बजे शुरू हुआ यह मार्च तीन किलोमीटर चलकर जगन्नाथपुर मंदिर के पास पहुंचा, जहां पुलिस ने तीन परतों में बैरिकेडिंग कर रखी थी. छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और विधानसभा में घुस गए. पुलिस ने लाठीचार्ज किया, पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले दागे. लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे.
इस मार्च के दौरान सबसे चर्चित चेहरा थे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो. वे पिछले नौ दिनों से अनशन पर थे और 10.5 किलो वजन कम कर चुके थे. चलने में असमर्थ, वे एम्बुलेंस में सवार होकर मार्च में शामिल हुए. महतो के हाथों में थी शिबू सोरेन की तस्वीर.
क्यों उठाई शिबू सोरेन की फोटो?
यह सवाल इस पूरे आंदोलन की कुंजी है. छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने जब शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर मार्च किया तो उन्होंने कहा, ‘गुरुजी शिबू सोरेन ने अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष किया और जीवनभर आंदोलन चलाए. अगर वे जिंदा होते, तो वे हमारे इस प्रदर्शन में शामिल होते. गुरुजी अब हमारे साथ नहीं हैं, हमारे पास इस प्रदर्शन में उनकी तस्वीर है.’
महतो ने अपनी बात को हेमंत सोरेन की ओर मोड़ते हुए कहा, ‘अगर हेमंत सोरेन गुरुजी को अपना आदर्श मानते हैं…’ इतना कहकर उन्होंने सवाल छोड़ दिया कि आखिर सरकार छात्रों की मांग क्यों नहीं मान रही. यानी छात्र साफ कह रहे थे, ‘आपके पिता जिस आदर्श और संघर्ष के लिए जाने जाते थे, आप उस पर खरे नहीं उतर रहे.’
‘दिशोम गुरु’ कहे जाने वाले शिबू सोरेन कौन थे?
इस पूरे प्रकरण को समझने के लिए शिबू सोरेन की विरासत को जानना जरूरी है.
शिबू सोरेन झारखंड के आदिवासी आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे थे. शिबू ने 1972 में JMM की स्थापना की और 1980 के दशक से झारखंड राज्य आंदोलन का नेतृत्व किया. वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे और उन्हें ‘दिशोम गुरु’ (जनजातीय गुरु) के नाम से जाना जाता है.
शिबू का जीवन जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान के संघर्ष का प्रतीक था. वे महाजनों, जमींदारों और पुलिस की बर्बरता के खिलाफ लड़े. झारखंड की पीढ़ियां उन्हीं को देखकर बड़ी हुई हैं. यही वजह है कि छात्रों के लिए शिबू सोरेन सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं- न्याय, संघर्ष और सत्य के प्रतीक.
इस पूरे मामले पर विरोधाभास क्या है?
यहीं असली मसला है क्योंकि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों ने शिबू सोरेन के बड़े-बड़े कटआउट लगा रखे हैं. एक छात्रा उनके कटआउट के आगे सिर झुकाकर गुहार लगाई कि ‘गुरुजी, आपने जिस झारखंड को शोषण और धांधली के खिलाफ लड़कर बनाया था, आज उसी राज्य में आपके बेटे के राज में युवाओं के सपनों का सौदा हो रहा है.’
एक प्रदर्शनकारी ने तो सीधा आरोप लगाया, ‘आपने शिबू सोरेन के सपने को तोड़ दिया है.’ यानी छात्र शिबू सोरेन की विरासत को हेमंत सोरेन की सरकार से अलग कर रहे हैं. पिता के आदर्शों का सम्मान करते हुए बेटे की सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने सोरेन सीनियर की विरासत को उनके बेटे की राजनीति से अलग कर दिया है, इस तरह पिता का जश्न मनाते हुए बेटे की सरकार पर हमला कर रहे हैं.
पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच झड़पें हुईं. एक घायल प्रदर्शनकारी ने कहा, ‘हेमंत सोरेन जी, आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था. हम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे. हमने कोई गाली नहीं दी. अचानक पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया. यह अच्छा नहीं है.’
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी और BJP नेता आदित्य साहू को मुख्यमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करने के दौरान हिरासत में लिया गया. मरांडी ने कहा कि JPSC, JSSC और CGL सभी की CBI जांच होनी चाहिए.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों पर बल प्रयोग को ‘गलत’ करार दिया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, ‘संवाद, लाठी-डंडा-बंदूक नहीं, सभी समस्याओं का समाधान है.’ उन्होंने छात्रों से बातचीत करने की अपील भी की.
