छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में श्रवण सूर्यवंशी की जेल में मौत मामले की जांच अब सीबीआई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के कामकाज पर कड़ी नाराजगी जताते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले में ढाई साल तक एफआईआर दर्ज नहीं करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
क्या है मामला?
18 जनवरी 2024 को बिलासपुर जिले के सीपत थाने की पुलिस ने 34 साल के श्रवण सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया था. यह उनकी किराने की दुकान में बिक्री के लिए 1200 रुपए की कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में हुई थी. गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया. 21 जनवरी को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया. 22 जनवरी की सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
सिर पर चोट से मौत
श्रवण की मौत के बाद सीजेएम, बिलासपुर के निर्देश पर मौत की जांच कराई गई. इस जांच में मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट को बताया गया. इसके बाद श्रवण के परिवार ने पुलिसकर्मियों और जेल अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की. उन्होंने 50 लाख रुपये मुआवजे की भी मांग की.अक्टूबर, 2024 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा परिवार
श्रवण की पत्नी लहरा बाई और उनकी 8 और 10 साल की नाबालिग बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश पर असंतोष जताते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाए. कोर्ट ने राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव और डीजीपी को 4 अगस्त को वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए पेश होने का आदेश दिया. कोर्ट की इस सख्ती के बाद 30 अगस्त को मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई.
सीबीआई जांच और अंतरिम मुआवजा
बुधवार, 12 अगस्त को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने में ढाई साल की देरी पर सवाल उठाए. जजों ने कहा मामले की जांच का ज़िम्मा पुलिस के पास बनाए रखना न्यायसंगत नहीं लगता. इसके बाद कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया. जजों ने यह भी कहा कि मृतक अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था. कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से कहा कि वह परिवार को फिलहाल 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दे. अंतिम मुआवजा राशि पर बाद में फैसला किया जाएगा.
