राज्यसभा में बुधवार (12 अगस्त) को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब लेफ्ट (सीपीएम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया कि BJP की सांसद सुष्मिता देव मुझे लुंगी वाला, लुंगी वाला कहती हैं. इसके बाद विपक्षी दलों ने ब्रिटास के समर्थन में जमकर हंगामा किया.
हंगामे के बीच चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संबंधित सांसदों को अपने चैंबर में बुलाएंगे और कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद कि गरिमा और उसके सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाया जाए.
किरेन रिजिजू ने किया हस्तक्षेप
वहीं संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अगर ऐसा कुछ भी जो आपत्तिजनक है, तो आप (सभापति) उन्हें चेंबर में बुलाकर उनकी आपत्ति सुनें. किरेन रिजिजू और सदन के नेता जेपी नड्डा ने चेयरमैन से सुष्मिता देव को भी बोलने की अनुमति देने का आग्रह किया. वह बोलने की अनुमति मांगने के लिए चेयरमैन के पास गईं.
इस बीच, कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी सांसदों ने मांग की कि विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति दी जाए. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए दिए गए दान की कथित चोरी को लेकर नारे भी लगाए. जब दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, तो चेयरमैन ने कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.
क्या है पूरा मामला?
ब्रिटास ने सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान उन्हें ‘लुंगी वाला’ कहने के लिए सुष्मिता देव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था. बुधवार को बोलने की अनुमति मिलने के बाद, ब्रिटास ने कहा कि जब वह सोमवार दोपहर इनकम टैक्स (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के खिलाफ एक वैधानिक प्रस्ताव पेश कर रहे थे, तो BJP सांसद अपनी निर्धारित सीट छोड़कर ठीक उनके पीछे वाली सीट पर आ गईं. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने बार-बार उन्हें ‘लुंगीवाला’ कहा.
