मोदी सरकार की तरफ से बुधवार (12 अगस्त, 2026) को मानसून सत्र के दौरान संसद के निचले सदन लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक यानी FCRA अमेंडमेंट बिल पेश किया गया. सदन में इस बिल के पेश होते ही विपक्ष ने इसका जोरों-शोर से विरोध शुरू कर दिया. साथ ही साथ, सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की मांग भी की जाने लगी. अब इस FCRA संशोधन बिल पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का भी रिएक्शन सामने आया है.
वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए इस बिल की आलोचना की. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हमारा स्टैंड इसे लेकर पूरी तरह से साफ है. सरकार को इस बिल को वापस लेना चाहिए.’
सरकार ने बिल को JPC के पास भेजने का रखा प्रस्ताव
लोकसभा में इस बेहद महत्वपूर्ण FCRA संशोधन विधेयक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बजाय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में पेश किया. सदन में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों की विरोध और हंगामे के बीच सरकार ने इस बिल की विस्तार से जांच और इस पर गहन चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने का प्रस्ताव भी रखा.
सरकार का मानना है कि संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम संशोधन विधेयक (FCRA संशोधन बिल) पर गंभीर और विस्तृत चर्चा हो सकती है. इसके साथ ही, विपक्षी दलों के सदस्य भी इस बिल में किसी भी तरह की सुधार के लिए अपने सुझाव भी दे सकते हैं.
#WATCH | Delhi: Regarding the FCRA bill being sent to the JPC, Congress MP Priyanka Gandhi Vadra says, “Our stance is that this bill should be withdrawn.” pic.twitter.com/lzPF2WaQfP
— ANI (@ANI) August 12, 2026
The entire Opposition is demanding that the draconian FCRA Amendment Bill be withdrawn.
On the one hand, RSS gets crores in foreign funding, while on the other, minority-run institutions and NGOs are subjected to laws design to harass them.
Buckling under pressure, the Home… pic.twitter.com/cES4IKlNpt
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) August 12, 2026
केसी वेणुगोपाल ने सदन में RSS पर साधा निशाना
लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बीच कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि पूरा विपक्ष इस कठोर FCRA संशोधन बिल को वापस लेने की मांग कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘एक तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को विदेशों से करोड़ों की फंडिंग मिलती है, वहीं दूसरी तरफ सरकार अल्पसंख्यकों की तरफ से चलाए जा रहे संस्थानों और NGOs को परेशान करने के लिए ऐसा बिल लेकर आ रही है.’
कांग्रेस सांसद ने कहा, ‘गृह मंत्री को दबाव में झुकते हुए अब इस बिल को संसद से जबरन पारित कराने के बजाय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की सिफारिश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. जेपीसी में भी हम इस बिल का पुरजोर विरोध करना जारी रखेंगे और इन असंवैधानिक और दमनकारी प्रावधानों को कानून का रूप लेने नहीं देंगे.’
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