गमले में अखरोट उगाने के लिए सबसे पहला और जरूरी काम है सही किस्म का चुनाव करना. बाजार में अखरोट की कई किस्में मिलती हैं, लेकिन गमले के लिए बौनी यानी कम ऊंचाई वाली किस्में सबसे बेहतर मानी जाती हैं, क्योंकि ये आकार में छोटी रहती हैं और सीमित जगह में भी अच्छी तरह बढ़ती हैं. नर्सरी से हमेशा ग्राफ्टेड यानी कलम से तैयार किया गया पौधा ही खरीदें, क्योंकि इससे बने पौधे जल्दी फल देना शुरू करते हैं. अगर आप बीज से पौधा तैयार करना चाहते हैं, तो ध्यान रखें कि इसमें फल आने में कई साल लग सकते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग तैयार पौधा लगाना ही पसंद करते हैं.

अखरोट का पेड़ बड़ा होता है और इसकी जड़ें भी गहरी फैलती हैं, इसलिए इसके लिए एक बड़ा और मजबूत गमला लेना बहुत जरूरी है. शुरुआत में कम से कम 18 से 24 इंच चौड़ा और उतना ही गहरा गमला इस्तेमाल करें. जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता जाए, उसे समय-समय पर बड़े गमले में बदलते रहें ताकि जड़ों को फैलने की पूरी जगह मिल सके. गमले के नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर होने चाहिए, वरना पानी जमा होने से जड़ें सड़ सकती हैं. मिट्टी की तह के नीचे कुछ कंकड़ या टूटे हुए मिट्टी के बर्तन के टुकड़े डाल दें, इससे पानी का निकास और भी अच्छा हो जाता है.

अखरोट के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी चाहिए जो उपजाऊ हो और जिसमें पानी आसानी से निकल जाए. इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में गोबर की खाद, कोकोपीट और थोड़ी सी रेत मिलाकर एक अच्छा मिश्रण तैयार करें. यह मिश्रण मिट्टी को हल्का और पोषक तत्वों से भरपूर बनाता है, जिससे पौधे की जड़ों को बढ़ने में आसानी होती है. मिट्टी का पीएच स्तर हल्का अम्लीय से लेकर सामान्य के बीच होना अच्छा माना जाता है.

अखरोट का पौधा ठंडी जलवायु में अच्छी तरह पनपता है, इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां सुबह की हल्की धूप मिले लेकिन दोपहर की तेज गर्मी से बचाव भी हो सके. अगर आप गर्म इलाके में रहते हैं, तो गर्मियों के मौसम में पौधे को छायादार जगह पर रखना बेहतर रहेगा. अखरोट के पौधे को ठंड की जरूरत होती है, इसलिए सर्दियों में इसे ठंडी हवा और हल्की धूप दोनों मिलनी चाहिए. इसी वजह से मैदानी इलाकों में इसे उगाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन गमले में उगाने का फायदा यह है कि मौसम के हिसाब से पौधे की जगह बदली जा सकती है.

अखरोट के पौधे को नियमित रूप से पानी देना जरूरी है, लेकिन मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए. मिट्टी को छूकर देखें, अगर ऊपर की सतह सूखी लगे तभी पानी दें. गर्मियों में पानी की जरूरत थोड़ी बढ़ जाती है, जबकि सर्दियों में इसे कम कर देना चाहिए। पौधे की अच्छी बढ़वार के लिए हर एक-दो महीने में जैविक खाद जैसे गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना फायदेमंद रहता है. इससे पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहते हैं और उसकी पत्तियां हरी-भरी बनी रहती हैं.

गमले में अखरोट उगाना एक धैर्य वाला काम है, क्योंकि इसमें फल आने में कई साल लग सकते हैं. ग्राफ्टेड पौधे से आमतौर पर तीन से पांच साल के बीच फल मिलना शुरू हो जाता है, जबकि बीज से उगाए गए पौधे में इससे भी ज्यादा समय लग सकता है. इस दौरान पौधे की समय-समय पर हल्की छंटाई करते रहें, ताकि उसकी शाखाएं सही आकार में बढ़ें और हवा-रोशनी अंदर तक पहुंच सके. अगर सही देखभाल की जाए, तो गमले में लगा यह पौधा कुछ सालों बाद कश्मीर जैसे स्वादिष्ट और ताजे अखरोट देने लगता है, और घर पर ही मेवे का यह खजाना पाना किसी उपलब्धि से कम नहीं लगता.
Published at : 17 Aug 2026 10:23 PM (IST)
