कांग्रेस सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने बुधवार को राज्य में तेजी से बढ़ रहे ‘मुफ्त की चीजों’ (freebies) वाले कल्चर पर सवाल उठाया. कोर्ट ने पूछा कि बिना किसी कानूनी आधार वाली कल्याणकारी योजनाओं पर जनता का पैसा क्यों बर्बाद किया जाना चाहिए.वित्त विभाग के खिलाफ अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस नागेश भीमपाका ने वित्तीय बोझ पर चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि “खतरे की घंटी बज रही है” और अगर यह चलन जारी रहा तो ‘धन के देवता कुबेर भी मुफ्त की चीजों के लिए लाइन में लग जाएंगे.’ कोर्ट ने ‘रायतू भरोसा’ और मुफ्त चावल जैसी योजनाओं के लंबे समय तक चलने की क्षमता पर सवाल उठाए. कोर्ट ने देखा कि इन योजनाओं का फायदा करोड़पतियों और महंगी मोटरसाइकिल चलाने वाले लोगों को भी मिल रहा था, जबकि 1.03 करोड़ कल्याणकारी लाभार्थियों की व्यवस्था राज्य के खजाने पर भारी बोझ डाल रही थी.
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
ये कड़ी टिप्पणियां हाई कोर्ट द्वारा 12 अगस्त को ‘कल्याण लक्ष्मी’ और ‘शादी मुबारक’ योजनाओं पर अंतरिम रोक लगाने और लाभार्थियों को सभी भुगतान रोकने के आदेश के ठीक एक दिन बाद आईं. 2014 से इन योजनाओं को चलाने वाले आठ सरकारी आदेशों (GOs) पर कोर्ट का यह आदेश उनकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका के बाद आया.
याचिकाकर्ता का क्या कहना?
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि SC, ST, अल्पसंख्यक, BC और EBC समुदायों की अविवाहित महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली ये योजनाएं बिना किसी कानूनी आधार के लागू की जा रही थीं, जो संविधान के वित्तीय अनुशासन से जुड़े अनुच्छेदों का उल्लंघन है.सरकार द्वारा जवाबी हलफ़नामा दाखिल करने के लिए और समय मांगने पर, जज ने रोक का आदेश दिया और मामले की सुनवाई 9 सितंबर तक के लिए टाल दी.
सरकार, जिसने अब तक 16.78 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए 16,375 करोड़ से ज़्यादा खर्च किए हैं, ने घोषणा की है कि वह इस रोक के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील करेगी और इसे एक अस्थायी कानूनी अड़चन बताएगी. BC कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने पिछली BRS सरकार पर “खराब” सरकारी आदेश (GOs) जारी करने का आरोप लगाया और भरोसा दिलाया कि कांग्रेस सरकार उन्हें ठीक करेगी. हालांकि, 7 अगस्त को हाई कोर्ट की टिप्पणियों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभों को बिना सोचे-समझे बढ़ाने पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.
CWC बैठक: वंदे मातरम पर प्रस्ताव पारित, राहुल बोले- ‘TMC को देखिए कैसे…’
सरकार कर रही कल्याणकारी योजनाओं का बचाव
कोर्ट ने अयोग्य लाभार्थियों और संसाधन जुटाने के लिए जमीन बेचने पर राज्य की निर्भरता की ओर इशारा किया था. सरकार अपनी प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का बचाव करने की कोशिश कर रही है, और इसमें राजनीतिक दांव बहुत ऊंचे हैं.कोर्ट के दखल को राज्य के कल्याणकारी मॉडल के लिए सीधी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है; जज ने खुले तौर पर सवाल किया है कि “आने वाली पीढ़ियों का भविष्य क्या है?”. जहां सरकार ने योजनाओं को जारी रखने के अपने संकल्प को दोहराया है, वहीं कानूनी और वित्तीय जांच भी तेज हो गई है. अगली सुनवाई से इन योजनाओं का भविष्य तय हो सकता है और यह भी पता चल सकता है कि सख्त न्यायपालिका के सामने सरकार अपनी ‘मुफ्त सुविधा’ वाली संस्कृति का बचाव कैसे करती है.
Xप्लेन: क्या वाकई होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान कंट्रोल खो रहा है? अब किसका कब्जा
