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नाक में चांदी की नथ पहनना शुभ या अशुभ? जान लें शास्त्रों का यह सख्त नियम


भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार का विशेष महत्व है, जिसमें नाक की नथ सुहाग और नारी सौंदर्य का सबसे प्रमुख प्रतीक मानी जाती है. धार्मिक परंपराओं और वैदिक ज्योतिष में शरीर के अलग-अलग अंगों के लिए विशिष्ट धातुओं का विधान तय किया गया है. जहां महिलाएं आमतौर पर सोने या हीरे की नथ पहनती हैं, वहीं शास्त्रों में नाक में चांदी की नथ पहनने की सख्त मनाही की गई है.

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का बुनियादी नियम कहता है कि नाभि के ऊपर सोना और नाभि के नीचे चांदी धारण करनी चाहिए. सिर, कान, गला और नाक जैसे ऊपरी अंगों में सोना पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि सोना सूर्य और बृहस्पति का प्रतिनिधित्व करता है जो मान-सम्मान और तेज को बढ़ाता है. इसके विपरीत, चांदी को पैरों में पायल या बिछिया के रूप में पहना जाता है ताकि शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहे.

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र का बुनियादी नियम कहता है कि नाभि के ऊपर सोना और नाभि के नीचे चांदी धारण करनी चाहिए. सिर, कान, गला और नाक जैसे ऊपरी अंगों में सोना पहनना शुभ माना जाता है, क्योंकि सोना सूर्य और बृहस्पति का प्रतिनिधित्व करता है जो मान-सम्मान और तेज को बढ़ाता है. इसके विपरीत, चांदी को पैरों में पायल या बिछिया के रूप में पहना जाता है ताकि शरीर में ऊर्जा का संतुलन बना रहे.

शास्त्रों में नथ का सीधा संबंध सुखी दांपत्य और शुक्र ग्रह से माना गया है, जो प्रेम और आकर्षण के कारक हैं. नथ सौभाग्य की निशानी है, इसलिए इसे सोने में ही पहनना मंगलकारी माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, नाक में चांदी की नथ पहनने से शुक्र का प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिससे पति-पत्नी के रिश्ते में तालमेल की कमी और अनावश्यक कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

शास्त्रों में नथ का सीधा संबंध सुखी दांपत्य और शुक्र ग्रह से माना गया है, जो प्रेम और आकर्षण के कारक हैं. नथ सौभाग्य की निशानी है, इसलिए इसे सोने में ही पहनना मंगलकारी माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, नाक में चांदी की नथ पहनने से शुक्र का प्रभाव कमजोर हो सकता है, जिससे पति-पत्नी के रिश्ते में तालमेल की कमी और अनावश्यक कलह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.

चांदी धातु का सीधा आधिपत्य चंद्रमा पर होता है, जो शीतलता और मन की चंचलता का कारक है. नाक का अग्रभाग शरीर के प्राण-प्रवाह और श्वसन तंत्र से सीधे जुड़ा रहता है. जब नाक में शीतल धातु चांदी पहनी जाती है, तो चंद्रमा के प्रभाव से महिला के स्वभाव में अत्यधिक भावुकता, अनिर्णय और मानसिक तनाव बढ़ सकता है.

चांदी धातु का सीधा आधिपत्य चंद्रमा पर होता है, जो शीतलता और मन की चंचलता का कारक है. नाक का अग्रभाग शरीर के प्राण-प्रवाह और श्वसन तंत्र से सीधे जुड़ा रहता है. जब नाक में शीतल धातु चांदी पहनी जाती है, तो चंद्रमा के प्रभाव से महिला के स्वभाव में अत्यधिक भावुकता, अनिर्णय और मानसिक तनाव बढ़ सकता है.

धार्मिक मान्यताओं में स्वर्ण को माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है, इसलिए चेहरे और सिर पर सोने के आभूषण धारण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार, चेहरे पर चांदी की नथ पहनने से लक्ष्मी का अनादर माना जाता है, जिससे घर की बरकत प्रभावित होने और आर्थिक उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है.

धार्मिक मान्यताओं में स्वर्ण को माता लक्ष्मी का साक्षात स्वरूप माना गया है, इसलिए चेहरे और सिर पर सोने के आभूषण धारण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. शास्त्रों के अनुसार, चेहरे पर चांदी की नथ पहनने से लक्ष्मी का अनादर माना जाता है, जिससे घर की बरकत प्रभावित होने और आर्थिक उतार-चढ़ाव आने की आशंका रहती है.

आयुर्वेद और एक्यूप्रेशर के अनुसार नाक छिदवाने का संबंध महिला के प्रजनन तंत्र और श्वसन प्रणाली से होता है. सोने की प्राकृतिक ऊष्मा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखती है, जबकि चांदी की अत्यधिक ठंडक कफ दोष और ऊर्जा के असंतुलन का कारण बन सकती है. इसलिए किसी विशेष ज्योतिषीय उपाय के अलावा दैनिक जीवन में केवल सोने या हीरे की नथ पहनना ही उत्तम माना जाता है.

आयुर्वेद और एक्यूप्रेशर के अनुसार नाक छिदवाने का संबंध महिला के प्रजनन तंत्र और श्वसन प्रणाली से होता है. सोने की प्राकृतिक ऊष्मा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखती है, जबकि चांदी की अत्यधिक ठंडक कफ दोष और ऊर्जा के असंतुलन का कारण बन सकती है. इसलिए किसी विशेष ज्योतिषीय उपाय के अलावा दैनिक जीवन में केवल सोने या हीरे की नथ पहनना ही उत्तम माना जाता है.

Published at : 21 Aug 2026 09:53 AM (IST)

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